डायबिटीज़ में शहर की तेज़ लाइफ शुगर क्यों बिगाड़ती है?
शहर की चमक-दमक, ऊँची इमारतें, मेट्रो की रफ्तार, ऑफिस की डेडलाइन, ट्रैफिक जाम, देर रात तक जागना और सुबह जल्दी उठना – यह सब सुनने में बहुत आकर्षक लगता है। लेकिन डायबिटीज़ वाले व्यक्ति के लिए यही “तेज़ लाइफ” चुपचाप सबसे बड़ा दुश्मन बन जाती है। इंडिया के महानगरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, […]
डायबिटीज़ में गांव की देसी आदतें कब नुकसान करती हैं?
भारत के गांवों में डायबिटीज़ अब कोई नई बात नहीं रही। लेकिन ज्यादातर लोग इसे अभी भी “शहरी बीमारी” या “अमीरों की बीमारी” समझते हैं। गांव में खुली हवा, खेती का काम, घर का बना खाना – ये सब सुनने में बहुत अच्छा लगता है, लेकिन जब बात डायबिटीज़ कंट्रोल की आती है तो कई […]
डायबिटीज़ में बुजुर्गों की शुगर अलग तरह से क्यों बिहेव करती है?
भारत में ६० साल से ऊपर की उम्र के ज्यादातर डायबिटीज़ मरीजों की सबसे आम शिकायत यही रहती है – “कल तो १२० थी, आज सुबह १८० क्यों आ गई?” “दवा तो वही ली है, खाना भी वैसा ही था, फिर भी शुगर अलग-अलग क्यों आ रही है?” “हाइपो का अंदाज़ा ही नहीं लगता, अचानक […]
डायबिटीज़ में महिलाओं की बीमारी को हल्के में क्यों लिया जाता है?
भारत में जब किसी महिला को डायबिटीज़ का पता चलता है तो घर में पहली बात अक्सर यही होती है – “अरे, थोड़ी सी शुगर है… घर संभालो, दवा लेते रहो, सब ठीक हो जाएगा।” यह वाक्य सुनकर लगता है जैसे बीमारी बहुत छोटी-मोटी है। लेकिन हकीकत में महिलाओं में डायबिटीज़ पुरुषों की तुलना में […]
डायबिटीज़ में ऑफिस का स्ट्रेस सबसे बड़ा ट्रिगर क्यों है?
भारत में डायबिटीज़ के मरीजों की सबसे बड़ी शिकायत यही सुनने को मिलती है – “ऑफिस में टेंशन रहती है तो शुगर कंट्रोल से बाहर चली जाती है”। सुबह घर से निकलते समय फास्टिंग १२५ थी, ऑफिस पहुँचते-पहुँचते ट्रैफिक जाम, बॉस का मेल, डेडलाइन का प्रेशर – और शाम को चेक किया तो २१०–२४०। कई […]
डायबिटीज़ में त्योहारों का डर कैसे बनता है?
दिवाली, होली, रक्षाबंधन, करवा चौथ, छठ, दशहरा, ईद, क्रिसमस – भारत में हर महीने कोई न कोई त्योहार आता रहता है। इन दिनों घर में मिठाई की खुशबू, तले-भुने का स्वाद, परिवार-रिश्तेदारों की भीड़ और एक-दूसरे को खिलाने-पिलाने की होड़। लेकिन डायबिटीज़ वाले व्यक्ति के लिए यही त्योहार खुशी के साथ-साथ सबसे बड़ा डर भी […]
डायबिटीज़ में मेहमान आने पर शुगर क्यों बिगड़ती है?
भारत में मेहमान आते ही घर में सबसे पहले क्या होता है? चाय के साथ बिस्किट, समोसा, नमकीन… फिर मिठाई, हलवा, जलेबी, रसगुल्ला… और शाम होते-होते भारी-भरकम पराठा-सब्जी-दाल-चावल। डायबिटीज़ वाले मरीज के लिए यह “मेहमानों का स्वागत” नहीं – बल्कि शुगर का सबसे बड़ा टेस्ट बन जाता है। अक्सर देखा जाता है कि मेहमान आने […]
डायबिटीज़ में घर वालों को समझाना इतना मुश्किल क्यों है?
डायबिटीज़ का नाम आते ही घर में सबसे पहले जो सवाल उठता है – “अब तो सब कुछ छोड़ना पड़ेगा क्या?” “मीठा बिल्कुल नहीं खाना?” “दवा से ही तो ठीक हो जाएगा न?” “हमारे घर में तो सबको शुगर है, कोई बड़ी बात नहीं…” ये सवाल सुन-सुनकर मरीज थक जाता है। समझाने की कोशिश करता […]
भारत में डायबिटीज़ को “छोटी बीमारी” क्यों समझ लिया जाता है?
भारत में जब किसी को डायबिटीज़ का पता चलता है तो पहली प्रतिक्रिया अक्सर यही होती है – “अरे, बस थोड़ी सी शुगर है… छोटी-मोटी बीमारी है… गोली लेते रहो, सब ठीक हो जाएगा।” यह वाक्य इतना आम हो चुका है कि लाखों परिवार इसे सामान्य मान लेते हैं। शुरुआती दौर में कोई बड़ा लक्षण […]