डायबिटीज़ में मशीन सही लेकिन रीडिंग गलत क्यों?
डायबिटीज़ में रोज़ शुगर चेक करना जीवन का हिस्सा बन जाता है। लेकिन बहुत से मरीजों की शिकायत रहती है – “मशीन तो बिल्कुल नई है, सही ब्रांड की है, फिर भी रीडिंग कभी १२०, कभी अचानक १९०, कभी बिना वजह ७०–८० आ जाती है”। दवा समय पर ली जा रही है, खान-पान पर ध्यान […]
डायबिटीज़ में टेस्ट स्ट्रिप स्टोर करने की आम गलती
डायबिटीज़ में रोज़ाना शुगर नापना जीवन का हिस्सा बन जाता है। लेकिन बहुत से मरीजों की रिपोर्ट रोज़ बदलती रहती है – कभी १२०, कभी अचानक १८०–२००, कभी बिना वजह ६०–७०। दवा, खाना, एक्सरसाइज़ सब सही होने के बावजूद रीडिंग में बार-बार उतार-चढ़ाव क्यों? ज्यादातर मामलों में असली वजह ग्लूकोमीटर या टेस्ट स्ट्रिप नहीं – […]
डायबिटीज़ में दवा और एक्सरसाइज़ का गलत तालमेल
डायबिटीज़ के मरीजों में सबसे आम गलतियों में से एक है – दवा तो समय पर ले ली, एक्सरसाइज़ भी रोज़ कर ली, लेकिन दोनों का तालमेल नहीं बैठ पाया। कई लोग सुबह खाली पेट दवा लेते हैं और फिर १ घंटे बाद तेज़ एक्सरसाइज़ शुरू कर देते हैं। नतीजा? ४५ मिनट बाद कंपकंपी, पसीना, […]
डायबिटीज़ में इंसुलिन लेते हुए भी डर क्यों बना रहता है?
इंसुलिन शुरू करने के बाद भी कई मरीजों का मन बार-बार यही सोचता रहता है – “कहीं ज्यादा हो गया तो?”, “अगर नींद में हाइपो हो गया तो?”, “यह तो अब जिंदगी भर लेनी पड़ेगी”, “शरीर पर क्या असर होगा?”। बाहर से देखने में सब ठीक चल रहा है, दवा समय पर ली जा रही […]
डायबिटीज़ में एक दिन की रिपोर्ट पर फैसला क्यों गलत है?
डायबिटीज़ के मरीजों में सबसे आम गलती यही है – एक दिन की शुगर रिपोर्ट देखकर तुरंत फैसला ले लेना। सुबह फास्टिंग ११० आई तो खुशी – “अब सब ठीक हो गया”। दोपहर २ घंटे बाद २१० दिखा तो डिप्रेशन – “फिर बिगड़ गई, सब बेकार”। एक दिन १४०–१६० रेंज में रह गया तो मन […]
डायबिटीज़ में रोज़ शुगर नापने से भी कंट्रोल क्यों नहीं?
डायबिटीज़ के मरीज अक्सर कहते हैं – “मैं तो रोज़ ४–५ बार शुगर नापता हूँ, फिर भी कंट्रोल नहीं हो रहा”। ग्लूकोमीटर हाथ में रहता है, रिपोर्ट्स मोबाइल में सेव हैं, लेकिन HbA1c ७.५–८.५ के बीच अटका रहता है। सुबह फास्टिंग १४०–१७०, खाने के २ घंटे बाद १९०–२४०, शाम को फिर १६०–२००। रोज़ नापने से […]