डायबिटीज़ में दूसरों की सलाह से मानसिक थकान
डायबिटीज़ का नाम आते ही सबसे पहले क्या होता है? हर तरफ से सलाहों का तांता शुरू हो जाता है। मम्मी कहती हैं “गेहूँ छोड़ दो, बाजरा-ज्वार खाओ”, पति/पत्नी बोलते हैं “तुम्हें तो अब सब कुछ छोड़ना पड़ेगा”, रिश्तेदार फोन करके बताते हैं “मेरे पड़ोसी ने लहसुन का जूस पीया और शुगर १०० पर आ […]
डायबिटीज़ में आराम करने पर गिल्ट क्यों होता है?
डायबिटीज़ में ज्यादातर लोग एक ही सोच में जीते हैं – “अगर आज आराम कर लिया तो शुगर बिगड़ जाएगी”। सुबह थोड़ा सुस्त लग रहा है, लेकिन मन कहता है “उठो, वॉक पर जाना है वरना फेल हो जाओगे”। शाम को थकान है, लेकिन सोचते हैं “अगर आज रेस्ट कर लिया तो कल का प्लान […]
डायबिटीज़ में हर स्पाइक को फेल्योर समझना क्यों गलत है?
डायबिटीज़ में ग्लूकोमीटर की स्क्रीन पर १८०, १९० या २२० देखते ही पहला रिएक्शन क्या होता है? “फिर से फेल हो गया… आज का दिन बर्बाद… मैं कभी कंट्रोल नहीं कर पाऊँगा।” यह एक बहुत आम प्रतिक्रिया है। इंडिया में करोड़ों डायबिटीज़ मरीज हर छोटे-बड़े स्पाइक को अपनी व्यक्तिगत असफलता मान लेते हैं। लेकिन वैज्ञानिक […]
डायबिटीज़ में हेल्थ वीडियो देख-देखकर कन्फ्यूज़ होना
डायबिटीज़ का नाम आते ही सबसे पहले क्या होता है? यूट्यूब खोलकर “डायबिटीज़ कंट्रोल कैसे करें”, “शुगर कम करने के घरेलू नुस्खे”, “डायबिटीज़ में क्या खाएं क्या न खाएं” टाइप करना। फिर १०–१५ वीडियो देखने के बाद सिर चकराने लगता है। एक कहता है “गेहूँ पूरी तरह छोड़ दो”, दूसरा कहता है “बहुत सारी रोटी […]
डायबिटीज़ में खुद को बीमार मान लेना शुगर कैसे बढ़ाता है?
डायबिटीज़ का पता चलते ही बहुत से लोग खुद को “बीमार” की कैटेगरी में डाल देते हैं। “मैं तो अब बीमार हूँ”, “मुझे तो सब कुछ छोड़ना पड़ेगा”, “जिंदगी खत्म हो गई” – ये वाक्य उनके रोज़ के बोलचाल में घुल-मिल जाते हैं। बाहर से देखने में यह सिर्फ़ बातें लगती हैं, लेकिन अंदर से […]
डायबिटीज़ में बहुत ज्यादा अनुशासन भी क्यों खतरनाक है?
डायबिटीज़ का पता चलने के बाद ज्यादातर लोग एक ही लक्ष्य पर टिक जाते हैं – “अब पूरी तरह अनुशासित होना है”। सुबह ६ बजे उठना, ४० मिनट वॉक, हर खाने की कैलोरी गिनना, हर २ घंटे में शुगर चेक करना, रात १० बजे सोना, एक भी चीज़ छोड़ना नहीं – सब कुछ परफेक्ट। शुरू […]
डायबिटीज़ में भविष्य की चिंता आज की शुगर कैसे बिगाड़ती है?
डायबिटीज़ का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले यही सवाल घूमने लगता है – “आगे क्या होगा?” “किडनी खराब हो जाएगी?”, “आँखों की रोशनी चली जाएगी?”, “पैर कटने की नौबत आ जाएगी?”, “बच्चों का क्या होगा?”, “कितने साल और जी पाऊँगा?” ये सवाल दिन-रात दिमाग में घूमते रहते हैं। बाहर से देखने में व्यक्ति […]