डायबिटीज़ में कंट्रोल नहीं, समझ जरूरी क्यों है?
डायबिटीज़ का नाम सुनते ही ज्यादातर लोग दवा, इंसुलिन, शुगर चेक और सख्त परहेज़ की बात सोचते हैं। लेकिन असल सवाल यह नहीं कि शुगर कितनी कम है, बल्कि यह है कि शरीर में क्या हो रहा है। जब तक मरीज यह नहीं समझता कि बीमारी कैसे काम करती है, किन कारणों से बढ़ती है […]
डायबिटीज़ में लाइफस्टाइल चेंज क्यों सबसे मुश्किल हिस्सा है?
डायबिटीज़ की दवा लेना, इंसुलिन लगाना, रोज़ शुगर चेक करना – ये सब तकनीकी काम हैं। लेकिन असली जंग तो लाइफस्टाइल बदलने की है। इंडिया में ८०% से ज्यादा मरीज डॉक्टर की सलाह मानकर पहले २-३ महीने तो बदलाव करते हैं, लेकिन ६ महीने बाद ६०-७०% लोग पुरानी आदतों पर वापस लौट आते हैं। सवाल […]
डायबिटीज़ में सही जानकारी कैसे बीमारी को धीमा करती है?
डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है। शुरुआती सालों में लक्षण बहुत कम या साइलेंट होते हैं। लेकिन जब तक व्यक्ति को पता चलता है, तब तक कई बार बीमारी ५-१० साल पुरानी हो चुकी होती है। यहीं सही जानकारी सबसे बड़ा हथियार बन जाती है। सही जानकारी का मतलब […]
डायबिटीज़ में AI-based रिपोर्ट्स पर कितना भरोसा करें?
भारत में डायबिटीज़ के मरीजों की संख्या ७.७ करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। रोज़ाना लाखों लोग ग्लूकोमीटर, फ्लैश ग्लूकोज़ मॉनिटर (FGM) या कंटीन्यूअस ग्लूकोज़ मॉनिटर (CGM) से रीडिंग लेते हैं और कई ऐप्स में ये डेटा ऑटोमैटिक अपलोड होता है। ऐप्स AI का इस्तेमाल करके औसत, वैरिएबिलिटी, टाइम इन रेंज (TIR), हाइपो/हाइपर की संभावना […]
डायबिटीज़ में डिजिटल हेल्थ ऐप्स का सही इस्तेमाल
भारत में डायबिटीज़ अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही। ३० से ५० साल की उम्र में लाखों लोग रोज़ाना शुगर चेक करते हैं, दवा लेते हैं, फिर भी थकान, पैरों में झुनझुनी, सुबह हाई फास्टिंग और खाने के बाद स्पाइक जैसी शिकायतें बनी रहती हैं। डॉक्टर के पास हर महीने जाना संभव नहीं होता […]
डायबिटीज़ में हेल्थ इंश्योरेंस क्या कवर नहीं करता?
भारत में डायबिटीज़ के मरीजों की संख्या ७.७ करोड़ से ज्यादा हो चुकी है और हर साल लाखों नए केस जुड़ रहे हैं। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस ले लिया तो इलाज का सारा खर्च कंपनी उठा लेगी। लेकिन हकीकत यह है कि डायबिटीज़ जैसी क्रॉनिक बीमारी के मामले में पॉलिसी के बहुत […]
डायबिटीज़ में भविष्य का डर शुगर कैसे बढ़ाता है?
डायबिटीज़ का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में दवा, इंजेक्शन, शुगर चेक और डाइट आता है। लेकिन बहुत से मरीजों के लिए सबसे बड़ा दुश्मन न तो मीठा है और न ही चावल – बल्कि उनका अपना दिमाग है। “अब क्या होगा?”, “किडनी खराब हो जाएगी?”, “आँखें चली गईं तो?”, “बच्चों का क्या होगा?”, […]
डायबिटीज़ में परिवार का सपोर्ट कब प्रेशर बन जाता है?
डायबिटीज़ में परिवार का सपोर्ट सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। लेकिन वही सपोर्ट कई बार मरीज के लिए सबसे बड़ा प्रेशर बन जाता है। “बेटा दवा समय पर ले ले”, “ये मत खा, वो मत खा”, “तू तो बस दवा लेता रहता है, कुछ और नहीं करता”, “हम सब तेरे लिए इतना कर रहे […]
डायबिटीज़ में देसी सोच और मॉडर्न बीमारी का टकराव
भारत में डायबिटीज़ अब सिर्फ बीमारी नहीं रही, एक तरह का कल्चरल टकराव बन गई है। एक तरफ दादी-नानी की बातें – “बेटा करेला जूस पी ले, दवा की क्या ज़रूरत”, “मेथी का पानी बना के रख, सब ठीक हो जाएगा”। दूसरी तरफ मॉडर्न लाइफस्टाइल – सुबह ९ से रात ९ तक ऑफिस, बाहर का […]