भारत में दुबले लोगों को भी डायबिटीज़ क्यों हो रही है?
भारत में डायबिटीज़ अब सिर्फ मोटापे की बीमारी नहीं रह गई है। पिछले १५-२० सालों में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है – BMI १९ से २३ के बीच वाले, दिखने में पूरी तरह दुबले-पतले लोग भी टाइप-2 डायबिटीज़ के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर्स इसे “Lean Diabetes” या “Non-obese Type 2 Diabetes” कहते […]
डायबिटीज़ में इलाज से पहले समझ क्यों जरूरी है?
डायबिटीज़ में ज्यादातर लोग इलाज शुरू करते ही हैं – दवा ले ली, इंसुलिन शुरू कर दिया, डॉक्टर की सलाह मान ली। लेकिन इलाज से पहले बीमारी को समझना छोड़ देते हैं। नतीजा? दवा चलती है, लेकिन लक्षण बने रहते हैं। थकान, पैरों में जलन, सुन्नपन, खाने के बाद भारीपन – ये सब जारी रहता […]
डायबिटीज़ में लंबे समय तक एक ही दवा क्यों फेल होती है?
डायबिटीज़ की शुरुआत में ज्यादातर मरीजों को लगता है कि एक दवा जीवन भर चलेगी। मेटफॉर्मिन शुरू हुई तो HbA1c ७ से नीचे आ गया। ग्लिमेपिराइड जोड़ी तो और बेहतर कंट्रोल। लेकिन ५–७ साल बाद वही दवा कमजोर पड़ने लगती है। फास्टिंग १४०–१६०, पोस्टप्रैंडियल २००–२५० के आसपास चली जाती है। डॉक्टर दूसरी दवा जोड़ते हैं, […]
डायबिटीज़ में दवा लेते हुए भी हाइपो क्यों होता है?
डायबिटीज़ में दवा लेने का मकसद शुगर को कंट्रोल में रखना है, लेकिन कई बार यही दवा अचानक शुगर को इतना नीचे ले आती है कि मरीज को ठंडा पसीना, कंपकंपी, घबराहट, चक्कर और कमजोरी जैसा महसूस होने लगता है। इसे हाइपोग्लाइसीमिया या हाइपो कहते हैं। इंडिया में ग्लिमेपिराइड, ग्लाइक्लाज़ाइड, इंसुलिन और कभी-कभी अन्य दवाओं […]
डायबिटीज़ में रिपोर्ट ठीक लेकिन कंट्रोल क्यों नहीं?
डायबिटीज़ में सबसे ज्यादा सुनाई देने वाली बात यही है – “डॉक्टर साहब, HbA1c तो ६.७ है, रिपोर्ट तो बहुत अच्छी है… फिर भी थकान क्यों रहती है? पैरों में जलन क्यों है? सुबह उठते ही कमर दर्द क्यों होता है? खाने के बाद भारीपन क्यों लगता है?” डॉक्टर रिपोर्ट देखकर कहते हैं – “HbA1c […]
डायबिटीज़ में शुगर मशीन पर जरूरत से ज्यादा भरोसा?
डायबिटीज़ में घरेलू ग्लूकोमीटर (शुगर मशीन) आज हर मरीज की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। सुबह उठते ही फास्टिंग चेक, खाने के २ घंटे बाद पोस्टप्रैंडियल, कभी-कभी रात को भी रैंडम टेस्ट। मशीन पर इतना भरोसा बढ़ गया है कि बहुत से लोग डॉक्टर की लैब रिपोर्ट से पहले घर की रीडिंग को ही […]
डायबिटीज़ में दवा से ज्यादा जरूरी क्या मॉनिटर करना है?
डायबिटीज़ के मरीजों का सबसे बड़ा फोकस दवा और शुगर टेस्ट पर रहता है। सुबह-शाम ग्लूकोमीटर से रीडिंग लेते हैं, दवा समय पर खाते हैं और सोचते हैं कि बस यही काफी है। लेकिन हकीकत यह है कि दवा और शुगर टेस्ट से कहीं ज्यादा जरूरी कई अन्य चीजें मॉनिटर करना होता है। इंडिया में […]
डायबिटीज़ में “आज दवा नहीं ली” का मनोवैज्ञानिक असर
डायबिटीज़ के मरीजों के मन में सबसे बार-बार आने वाली बात यही होती है – “आज दवा नहीं ली… कोई बात नहीं… एक दिन से क्या फर्क पड़ता है?” यह सिर्फ एक विचार नहीं रहता, बल्कि एक पूरी भावनात्मक और व्यवहारिक श्रृंखला शुरू कर देता है। इंडिया में लाखों लोग हर हफ्ते १–३ दिन दवा […]