डायबिटीज़ में कामकाजी पुरुष सबसे ज्यादा क्या गलती करते हैं?
भारत में कामकाजी पुरुषों की जिंदगी आज बहुत तेज़ चल रही है। सुबह ८ बजे ऑफिस, शाम ८-९ बजे घर, बीच में मीटिंग्स, ट्रैफिक, क्लाइंट कॉल, बॉस का प्रेशर, EMI, बच्चों की फीस – इन सबके बीच खुद की सेहत पीछे छूट जाती है। ३५ से ५० साल की उम्र में टाइप-२ डायबिटीज़ के मामले […]
डायबिटीज़ में शादी-पार्टी का डर कैसे मैनेज करें?
शादी हो या जन्मदिन, दिवाली हो या किसी रिश्तेदार की सालगिरह – डायबिटीज़ वाले व्यक्ति के लिए ये मौके खुशी से ज्यादा चिंता का कारण बन जाते हैं। “अगर थोड़ा भी खा लिया तो शुगर ३०० पार कर जाएगी” “सब देखेंगे कि मैं अलग प्लेट ले रहा हूँ” “कहीं हाइपो न हो जाए और सबके […]
डायबिटीज़ में “थोड़ा मीठा चल जाता है” सोच का असर
भारत में डायबिटीज़ के मरीजों की सबसे आम और सबसे खतरनाक सोच यही है – “थोड़ा मीठा चल जाता है”। त्योहार पर एक गुलाब जामुन, शादी में दो लड्डू, जन्मदिन पर केक का छोटा टुकड़ा, पड़ोस में किसी ने बनाया तो एक चम्मच हलवा, शाम को चाय के साथ एक बिस्किट… ये छोटी-छोटी छूटें रोज़ […]
भारत में डायबिटीज़ अब “साइलेंट फैमिली बीमारी” क्यों बन गई है?
भारत में डायबिटीज़ अब सिर्फ एक व्यक्ति की बीमारी नहीं रही। यह धीरे-धीरे पूरी फैमिली में फैलने वाली साइलेंट फैमिली बीमारी बन गई है। एक घर में पति-पत्नी दोनों, माता-पिता में से एक या दोनों, कभी-कभी बच्चे भी – चारों तरफ डायबिटीज़ के मामले। सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती ५–१० साल तक यह […]
डायबिटीज़ में कंट्रोल नहीं, समझ जरूरी क्यों है?
डायबिटीज़ का नाम सुनते ही ज्यादातर लोग दवा, इंसुलिन, शुगर चेक और सख्त परहेज़ की बात सोचते हैं। लेकिन असल सवाल यह नहीं कि शुगर कितनी कम है, बल्कि यह है कि शरीर में क्या हो रहा है। जब तक मरीज यह नहीं समझता कि बीमारी कैसे काम करती है, किन कारणों से बढ़ती है […]
डायबिटीज़ में लाइफस्टाइल चेंज क्यों सबसे मुश्किल हिस्सा है?
डायबिटीज़ की दवा लेना, इंसुलिन लगाना, रोज़ शुगर चेक करना – ये सब तकनीकी काम हैं। लेकिन असली जंग तो लाइफस्टाइल बदलने की है। इंडिया में ८०% से ज्यादा मरीज डॉक्टर की सलाह मानकर पहले २-३ महीने तो बदलाव करते हैं, लेकिन ६ महीने बाद ६०-७०% लोग पुरानी आदतों पर वापस लौट आते हैं। सवाल […]
डायबिटीज़ में सही जानकारी कैसे बीमारी को धीमा करती है?
डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है। शुरुआती सालों में लक्षण बहुत कम या साइलेंट होते हैं। लेकिन जब तक व्यक्ति को पता चलता है, तब तक कई बार बीमारी ५-१० साल पुरानी हो चुकी होती है। यहीं सही जानकारी सबसे बड़ा हथियार बन जाती है। सही जानकारी का मतलब […]
डायबिटीज़ में AI-based रिपोर्ट्स पर कितना भरोसा करें?
भारत में डायबिटीज़ के मरीजों की संख्या ७.७ करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। रोज़ाना लाखों लोग ग्लूकोमीटर, फ्लैश ग्लूकोज़ मॉनिटर (FGM) या कंटीन्यूअस ग्लूकोज़ मॉनिटर (CGM) से रीडिंग लेते हैं और कई ऐप्स में ये डेटा ऑटोमैटिक अपलोड होता है। ऐप्स AI का इस्तेमाल करके औसत, वैरिएबिलिटी, टाइम इन रेंज (TIR), हाइपो/हाइपर की संभावना […]
डायबिटीज़ में डिजिटल हेल्थ ऐप्स का सही इस्तेमाल
भारत में डायबिटीज़ अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही। ३० से ५० साल की उम्र में लाखों लोग रोज़ाना शुगर चेक करते हैं, दवा लेते हैं, फिर भी थकान, पैरों में झुनझुनी, सुबह हाई फास्टिंग और खाने के बाद स्पाइक जैसी शिकायतें बनी रहती हैं। डॉक्टर के पास हर महीने जाना संभव नहीं होता […]