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डायबिटीज इन्सिपिडस

Hindi
August 22, 2024
• 5 min read
Naimish Mishra
Written by
Naimish Mishra
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diabetes-insipidus-pathophysiology-in-hindi

डायबिटीज इन्सिपिडस (Diabetes Insipidus) एक दुर्लभ विकार है जो शरीर में तरल पदार्थों की असंतुलन का कारण बनता है। इसके परिणामस्वरूप, व्यक्ति अत्यधिक प्यास और पेशाब की आवृत्ति में वृद्धि का अनुभव करता है। यह रोग तब उत्पन्न होता है जब शरीर एंटी-डाययूरेटिक हार्मोन (Antidiuretic Hormone – ADH) का सही तरीके से उत्पादन नहीं कर पाता या जब गुर्दे (Kidneys) ADH का उचित उपयोग नहीं कर पाते।

डायबिटीज इन्सिपिडस पैथोफिजियोलॉजी

डायबिटीज इन्सिपिडस की पैथोफिजियोलॉजी को समझने के लिए हमें यह जानना आवश्यक है कि ADH हार्मोन का शरीर में क्या कार्य है। यह हार्मोन पिट्यूटरी ग्लैंड (Pituitary Gland) द्वारा उत्पन्न होता है और गुर्दों में पानी के पुनःअवशोषण को नियंत्रित करता है। जब ADH का उत्पादन या उसका प्रभाव कम हो जाता है, तो शरीर में पानी की मात्रा में कमी हो जाती है, जिससे मूत्र की मात्रा में वृद्धि होती है और प्यास अधिक लगती है।

डायबिटीज इन्सिपिडस के प्रकार और उनकी पैथोफिजियोलॉजी

डायबिटीज इन्सिपिडस के कई प्रकार होते हैं, और हर प्रकार की पैथोफिजियोलॉजी अलग होती है। इसके मुख्य चार प्रकार हैं:

  • सेंट्रल डायबिटीज इन्सिपिडस: यह प्रकार तब होता है जब पिट्यूटरी ग्लैंड ADH का उत्पादन कम कर देता है। यह अक्सर सिर की चोट, ट्यूमर, या आनुवांशिक विकारों के कारण होता है।
  • नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस: इस प्रकार में गुर्दे ADH के प्रति प्रतिक्रिया देने में असफल होते हैं। यह सामान्यतः किडनी की बीमारी, दवाओं का उपयोग, या वंशानुगत विकारों के कारण होता है।
  • डिप्सोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस: यह तब होता है जब प्यास की भावना असामान्य रूप से बढ़ जाती है, जिससे अत्यधिक पानी पीने की आदत बन जाती है। यह मस्तिष्क में तृष्णा केंद्र (Thirst Center) की गड़बड़ी के कारण हो सकता है।
  • गर्भावस्था-संबंधी डायबिटीज इन्सिपिडस: यह गर्भावस्था के दौरान होता है, जब प्लेसेंटा एक एंजाइम (वसोपरेसिनेस) का उत्पादन करता है जो ADH को तोड़ देता है।

सेंट्रल डायबिटीज इन्सिपिडस की पैथोफिजियोलॉजी

सेंट्रल डायबिटीज इन्सिपिडस (Central Diabetes Insipidus) मुख्यतः पिट्यूटरी ग्लैंड के क्षति या हाइपोथैलमस (Hypothalamus) के विकारों के कारण उत्पन्न होता है। जब हाइपोथैलमस या पिट्यूटरी ग्लैंड में कोई चोट, ट्यूमर, या संक्रमण होता है, तो ADH का उत्पादन कम हो जाता है। इस हार्मोन की कमी से गुर्दे में पानी का पुनःअवशोषण कम हो जाता है, जिससे मूत्र का उत्पादन बढ़ जाता है।

नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस की पैथोफिजियोलॉजी

नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस (Nephrogenic Diabetes Insipidus) में गुर्दे ADH के प्रति प्रतिक्रिया देने में असफल होते हैं। यह रोग आमतौर पर गुर्दों के ट्यूब्यूल्स (Tubules) में किसी प्रकार की गड़बड़ी के कारण होता है। यह समस्या जन्मजात हो सकती है या दवाओं के कारण उत्पन्न हो सकती है, जैसे लिथियम (Lithium) का लंबी अवधि तक उपयोग।

डिप्सोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस की पैथोफिजियोलॉजी

डिप्सोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस (Dipsogenic Diabetes Insipidus) एक प्रकार का मनोरोग (Psychogenic) विकार है जिसमें व्यक्ति को अत्यधिक प्यास लगती है। यह हाइपोथैलमस के तृष्णा केंद्र में किसी गड़बड़ी के कारण होता है, जिससे व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में पानी पीने लगता है। अधिक पानी पीने से शरीर में ADH का उत्पादन घटता है, और मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है।

गर्भावस्था-संबंधी डायबिटीज इन्सिपिडस की पैथोफिजियोलॉजी

गर्भावस्था-संबंधी डायबिटीज इन्सिपिडस (Gestational Diabetes Insipidus) गर्भावस्था के दौरान होता है और यह प्लेसेंटा द्वारा उत्पन्न एक एंजाइम वसोपरेसिनेस (Vasopressinase) के कारण होता है। यह एंजाइम ADH को नष्ट कर देता है, जिससे इसके स्तर में कमी आती है। इस स्थिति में, गर्भवती महिला को अत्यधिक प्यास और पेशाब की शिकायत हो सकती है।

डायबिटीज इन्सिपिडस के लक्षण और निदान

डायबिटीज इन्सिपिडस के लक्षण मुख्यतः अत्यधिक प्यास (Polydipsia) और अत्यधिक पेशाब (Polyuria) होते हैं। व्यक्ति एक दिन में 3 से 20 लीटर तक पेशाब कर सकता है, जिससे शरीर में पानी की कमी (Dehydration) हो सकती है। इसके अलावा, रात में बार-बार पेशाब आना (Nocturia) भी एक आम लक्षण है।

निदान के लिए, चिकित्सक विभिन्न परीक्षण कर सकते हैं जैसे कि जल प्रतिबंध परीक्षण (Water Deprivation Test), मूत्र की जांच (Urine Osmolality Test), और रक्त परीक्षण (Blood Test) जिसमें ADH का स्तर मापा जाता है। इन परीक्षणों के माध्यम से यह निर्धारित किया जाता है कि व्यक्ति को डायबिटीज इन्सिपिडस है या नहीं, और यदि है, तो किस प्रकार का है।

डायबिटीज इन्सिपिडस का उपचार और प्रबंधन

डायबिटीज इन्सिपिडस का उपचार इसके प्रकार पर निर्भर करता है। सेंट्रल डायबिटीज इन्सिपिडस में, ADH का प्रतिस्थापन डेस्मोप्रेसिन (Desmopressin) के माध्यम से किया जाता है। यह एक सिंथेटिक हार्मोन है जो ADH की तरह कार्य करता है और पेशाब की मात्रा को कम करता है।

नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस का उपचार मुख्यतः उस कारण को ठीक करने पर केंद्रित होता है जो इस विकार को उत्पन्न कर रहा है। इसके लिए दवाओं का उपयोग किया जाता है जो गुर्दे की क्षमता को बढ़ाने में मदद करती हैं।

डिप्सोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस का उपचार मनोवैज्ञानिक उपचार और थैरेपी के माध्यम से किया जाता है, जिसमें व्यक्ति को अत्यधिक पानी पीने की आदत से दूर करने का प्रयास किया जाता है।

गर्भावस्था-संबंधी डायबिटीज इन्सिपिडस में, आमतौर पर डेस्मोप्रेसिन दिया जाता है क्योंकि यह प्लेसेंटा द्वारा नष्ट नहीं होता।

डायबिटीज इन्सिपिडस के जटिलताएँ और रोकथाम

डायबिटीज इन्सिपिडस के कारण कुछ जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे कि गंभीर पानी की कमी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, और अत्यधिक थकान। इन जटिलताओं से बचने के लिए रोग का समय पर और उचित उपचार आवश्यक है।

रोकथाम के लिए, यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज इन्सिपिडस के जोखिम कारक हैं, तो नियमित स्वास्थ्य जांच आवश्यक है। सही समय पर निदान और उपचार से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।

डायबिटीज इन्सिपिडस के साथ जीवन: रोगी के लिए सुझाव

डायबिटीज इन्सिपिडस के साथ जीवन जीना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही उपचार और जीवनशैली में बदलाव से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। रोगियों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, लेकिन अत्यधिक पानी पीने से बचना चाहिए। डेस्मोप्रेसिन जैसी दवाओं का नियमित उपयोग करना आवश्यक है, और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

डायबिटीज इन्सिपिडस का वैश्विक परिप्रेक्ष्य

वैश्विक स्तर पर, डायबिटीज इन्सिपिडस एक दुर्लभ रोग है, लेकिन इसके प्रबंधन में चिकित्सीय उन्नति के कारण रोगियों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है। विभिन्न देशों में इस रोग के उपचार के लिए विभिन्न दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल हैं, जो मरीजों को सर्वोत्तम संभव देखभाल प्रदान करते हैं।

डायबिटीज इन्सिपिडस और अनुसंधान: भविष्य की संभावनाएँ

डायबिटीज इन्सिपिडस के लिए अनुसंधान लगातार जारी है, और वैज्ञानिक नई दवाओं और उपचार विधियों पर कार्य कर रहे हैं। जीन थेरेपी (Gene Therapy) और स्टेम सेल रिसर्च (Stem Cell Research) जैसी आधुनिक चिकित्सा विधियाँ इस क्षेत्र में आशाजनक संभावनाएँ दिखा रही हैं।

डायबिटीज इन्सिपिडस एक जटिल और दुर्लभ विकार है, लेकिन इसे सही तरीके से समझने और प्रबंधित करने से रोगियों को एक सामान्य जीवन जीने में मदद मिल सकती है। इसके विभिन्न प्रकारों की पैथोफिजियोलॉजी को समझना आवश्यक है, ताकि सही समय पर उपचार शुरू किया जा सके। इसके लिए जागरूकता और चिकित्सीय मार्गदर्शन आवश्यक है।

FAQs

Q.1 – डायबिटीज इन्सिपिडस के मुख्य लक्षण क्या हैं?
मुख्य लक्षण अत्यधिक प्यास और बार-बार पेशाब आना है।

Q.2 – डायबिटीज इन्सिपिडस का सबसे सामान्य प्रकार कौन सा है?
सेंट्रल डायबिटीज इन्सिपिडस सबसे सामान्य प्रकार है।

Q.3 – क्या डायबिटीज इन्सिपिडस का इलाज संभव है?
हाँ, सही उपचार से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।

Q.4 – डायबिटीज इन्सिपिडस और डायबिटीज मेलिटस में क्या अंतर है?
डायबिटीज इन्सिपिडस में ADH की कमी होती है, जबकि डायबिटीज मेलिटस में इंसुलिन की कमी होती है।

Q.5 – क्या डायबिटीज इन्सिपिडस आनुवांशिक हो सकता है?
हाँ, कुछ मामलों में यह आनुवांशिक हो सकता है।

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