tap.health logo
  • Diabetes Management
  • Health Assistant
  • About Us
  • Blog
  • Contact Us
Start Free Trial
  • Diabetes Management
  • Health Assistant
  • About Us
  • Blog
  • Contact Us
  • All Blogs
  • Hindi
  • टाइप 2 डायबिटीज: पाथोफिजियोलॉजी और इसके जटिल तंत्र

टाइप 2 डायबिटीज: पाथोफिजियोलॉजी और इसके जटिल तंत्र

Hindi
August 22, 2024
• 5 min read
Naimish Mishra
Written by
Naimish Mishra
ChatGPT Perplexity WhatsApp LinkedIn X Grok Google AI
pathophysiology-of-type-2-diabetes-in-hindi

टाइप 2 डायबिटीज (T2D) एक जटिल और पुरानी चिकित्सा स्थिति है जो शरीर में ग्लूकोज मेटाबॉलिज़्म की असामान्यताओं के कारण होती है। इसका मुख्य कारण शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध और इंसुलिन की अपर्याप्तता है, जिसके कारण रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। 

टाइप 2 डायबिटीज

टाइप 2 डायबिटीज एक मेटाबॉलिक विकार है जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम प्रतिक्रिया देती हैं। इंसुलिन एक हार्मोन है जो पैंक्रियाज द्वारा स्रावित होता है और शरीर में ग्लूकोज के उपयोग को नियंत्रित करता है। टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों में, इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। यह स्थिति आमतौर पर मध्यम आयु वर्ग के लोगों में विकसित होती है, लेकिन हाल के वर्षों में, यह अधिक युवाओं में भी देखी जा रही है।

इंसुलिन प्रतिरोध का विकास

इंसुलिन प्रतिरोध वह स्थिति है जिसमें शरीर की कोशिकाएं, विशेषकर मांसपेशियों, वसा और यकृत की कोशिकाएं, इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता खो देती हैं। इसके परिणामस्वरूप, ये कोशिकाएं ग्लूकोज को अवशोषित नहीं कर पाती हैं, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे शरीर में इंसुलिन के उत्पादन को भी प्रभावित करती है, क्योंकि पैंक्रियाज अधिक इंसुलिन उत्पादन करने का प्रयास करता है, जिससे उसकी क्षमता धीरे-धीरे घटती जाती है।

इंसुलिन की अपर्याप्तता

जैसे-जैसे इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ता है, पैंक्रियाज अधिक इंसुलिन बनाने की कोशिश करता है। लेकिन समय के साथ, पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाएं थक जाती हैं और उनकी इंसुलिन उत्पादन की क्षमता कम हो जाती है। इस प्रकार, इंसुलिन की अपर्याप्तता हो जाती है, जो टाइप 2 डायबिटीज की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ग्लूकोज होमियोस्टेसिस का असंतुलन

स्वस्थ व्यक्तियों में, ग्लूकोज होमियोस्टेसिस यानी शरीर में ग्लूकोज के स्तर का संतुलन इंसुलिन और ग्लूकागन हार्मोन के माध्यम से बनाए रखा जाता है। लेकिन टाइप 2 डायबिटीज में, यह संतुलन बिगड़ जाता है। इंसुलिन की कम उपस्थिति और प्रभावशीलता के कारण, यकृत में ग्लूकोज का उत्पादन बढ़ जाता है, और कोशिकाओं में ग्लूकोज का अवशोषण कम हो जाता है। इसका परिणाम होता है कि रक्त में ग्लूकोज का स्तर उच्च बना रहता है।

टाइप 2 डायबिटीज के कारण

टाइप 2 डायबिटीज के विकास में अनेक कारक भूमिका निभाते हैं, जिनमें अनुवांशिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारक शामिल हैं।

अनुवांशिक कारक

यदि किसी व्यक्ति के परिवार में टाइप 2 डायबिटीज के मामले रहे हैं, तो उसमें इस बीमारी के विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है। कुछ विशिष्ट जीन म्यूटेशन जैसे TCF7L2 और KCNJ11, टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाते हैं।

पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारक

अस्वास्थ्यकर खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, और अधिक तनाव भी टाइप 2 डायबिटीज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मोटापा, विशेष रूप से, इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाता है, क्योंकि वसा ऊतक में बनने वाले हॉर्मोन और सिग्नलिंग मोलिक्यूल्स इंसुलिन की प्रभावशीलता को कम करते हैं।

सूजन और इंसुलिन प्रतिरोध

टाइप 2 डायबिटीज के विकास में सूजन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मोटापे के कारण शरीर में सूजन संबंधी मार्कर बढ़ जाते हैं, जिससे इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, एडिपोसाइट्स (वसा कोशिकाएं) से स्रावित साइटोकिन्स जैसे TNF-alpha और IL-6 भी सूजन को बढ़ाते हैं, जिससे इंसुलिन सिग्नलिंग बाधित होती है।

माइक्रोवस्कुलर और मैक्रोवस्कुलर जटिलताएँ

टाइप 2 डायबिटीज के दीर्घकालिक प्रभावों में माइक्रोवस्कुलर (छोटी रक्त वाहिकाओं से संबंधित) और मैक्रोवस्कुलर (बड़ी रक्त वाहिकाओं से संबंधित) जटिलताएँ शामिल हैं। माइक्रोवस्कुलर जटिलताओं में नेफ्रोपैथी (किडनी रोग), रेटिनोपैथी (नेत्र रोग), और न्यूरोपैथी (नर्व डैमेज) शामिल हैं। मैक्रोवस्कुलर जटिलताएँ जैसे कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, स्ट्रोक, और परिधीय धमनी रोग, हृदय और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करते हैं।

ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस

टाइप 2 डायबिटीज में, उच्च ग्लूकोज स्तर के कारण एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (AGEs) का निर्माण होता है। AGEs प्रोटीन और अन्य मोलिक्यूल्स के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और ऊतकों को नुकसान पहुँचाते हैं। इसके अलावा, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी डायबिटीज के जटिलताओं में योगदान देता है, जिससे कोशिकाओं को अधिक हानि पहुँचती है।

डायबिटिक केटोएसिडोसिस (DKA)

हालांकि DKA टाइप 1 डायबिटीज में अधिक आम है, लेकिन टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों में भी यह हो सकता है, विशेष रूप से जब वे संक्रमण, गंभीर बीमारी, या अन्य तनावपूर्ण स्थितियों का सामना कर रहे हों। DKA एक चिकित्सा आपातकालीन स्थिति है जिसमें शरीर अत्यधिक कीटोन उत्पादन करता है, जिससे रक्त अम्लीय हो जाता है।

सिरोसिस और फैटी लिवर डिज़ीज़

टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों में फैटी लिवर डिज़ीज़ का जोखिम अधिक होता है। यह स्थिति, जिसमें यकृत में अत्यधिक वसा जमा हो जाती है, सिरोसिस और यकृत कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ा सकती है।

टाइप 2 डायबिटीज का उपचार और प्रबंधन

टाइप 2 डायबिटीज का प्रबंधन एक बहु-आयामी प्रक्रिया है जिसमें खानपान, शारीरिक गतिविधि, दवाओं, और निगरानी शामिल होती है।

खानपान और शारीरिक गतिविधि

संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि टाइप 2 डायबिटीज के प्रबंधन में महत्वपूर्ण हैं। शर्करा और वसा की मात्रा को नियंत्रित करना, अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन, और नियमित व्यायाम करना रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

दवाएँ और इंसुलिन थेरेपी

जब आहार और व्यायाम से ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित नहीं हो पाता, तो दवाओं की आवश्यकता होती है। मेटफोर्मिन, एसयू (सुल्फोनील यूरिया), और GLP-1 एगोनिस्ट जैसी दवाएँ आमतौर पर प्रयोग की जाती हैं। कुछ रोगियों को इंसुलिन थेरेपी की भी आवश्यकता हो सकती है।

ग्लूकोज की नियमित निगरानी

रक्त शर्करा के स्तर की नियमित निगरानी टाइप 2 डायबिटीज के प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह रोगियों को अपने ग्लूकोज स्तर को ट्रैक करने और उसके अनुसार जीवनशैली में समायोजन करने की अनुमति देता है।

टाइप 2 डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य

डायबिटीज का मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। तनाव, चिंता, और अवसाद आमतौर पर डायबिटीज के साथ जुड़े रहते हैं, और इनका प्रबंधन भी उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

टाइप 2 डायबिटीज एक जटिल और पुरानी बीमारी है जो कई कारकों के संयोजन से उत्पन्न होती है। इसके पाथोफिजियोलॉजी में इंसुलिन प्रतिरोध, इंसुलिन की अपर्याप्तता, सूजन, और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस शामिल हैं। इसके प्रभाव शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ते हैं, जिससे विभिन्न प्रकार की जटिलताएँ हो सकती हैं। इसलिए, टाइप 2 डायबिटीज का प्रबंधन एक समग्र दृष्टिकोण की मांग करता है जिसमें आहार, व्यायाम, दवाओं, और मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है।

FAQs

Q.1 – टाइप 2 डायबिटीज कैसे होता है?

टाइप 2 डायबिटीज शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध और इंसुलिन की अपर्याप्तता के कारण होता है, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है।

Q.2 – क्या टाइप 2 डायबिटीज अनुवांशिक है?

हाँ, टाइप 2 डायबिटीज अनुवांशिक कारकों से जुड़ा होता है, लेकिन पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Q.3 – क्या टाइप 2 डायबिटीज का इलाज संभव है?

टाइप 2 डायबिटीज का इलाज नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे प्रबंधित किया जा सकता है। उचित आहार, व्यायाम, और दवाओं के माध्यम से रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित किया जा सकता है।

Q.4 – क्या टाइप 2 डायबिटीज से बचाव संभव है?

स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को कम किया जा सकता है। स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम, और स्वस्थ वजन बनाए रखना इसमें सहायक हो सकते हैं।

Q.5 – क्या टाइप 2 डायबिटीज के साथ सामान्य जीवन जिया जा सकता है?

हाँ, उचित प्रबंधन और जीवनशैली में बदलाव के साथ, टाइप 2 डायबिटीज के साथ भी सामान्य और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।

Tags
Medicine Health Lifestyle Home remedies Fitness Prevention Hygiene Ailments Hindi skin diseases acne vulgaris symptoms AI Search
More blogs
Dhruv Sharma
Dhruv Sharma
• January 20, 2026
• 5 min read

How Many Peanuts Can a Type 2 Diabetic Eat? A Complete Guide

It is 4 PM. You are sitting at your desk or watching TV, and you feel that familiar hunger pang. You want something crunchy. In an Indian home, the most common snack available is often the humble Peanut (Mungfali). But if you have Type 2 Diabetes, you pause. You know peanuts are healthy, but you […]

Diabetes
pathophysiology-of-type-2-diabetes-in-hindi
Dhruv Sharma
Dhruv Sharma
• January 20, 2026
• 5 min read

Are Roasted Peanuts Good for Pre-Diabetics? The Perfect Snack Guide

You went for a routine checkup, and the doctor gave you a warning: “You are Pre-Diabetic.” Suddenly, your world changes. You are not fully diabetic yet, but you are standing on the edge. You know you need to cut down on sugar, rice, and sweets. But then evening comes, and you crave a snack. You […]

Diabetes
pathophysiology-of-type-2-diabetes-in-hindi
Chetan Chopra
Chetan Chopra
• January 20, 2026
• 4 min read

What Nuts Should Diabetics Avoid? A Guide to Safe Snacking

If you have been diagnosed with Type 2 Diabetes, your doctor has likely told you: “Eat more nuts.” It is good advice. Nuts are generally packed with protein, healthy fats, and fibre—the holy trinity for stabilising blood sugar. But here is the catch that often gets missed: Not all nuts are created equal. While almonds […]

Diabetes
pathophysiology-of-type-2-diabetes-in-hindi
Do you remember your last sugar reading?
Log and Track your glucose on the Tap Health App
All logs in one place
Smart trend graphs
Medicine Reminder
100% Ad Free
Download Now

Missed your diabetes meds

again? Not anymore.

Get medicine reminders on your phone.

✓ Glucose diary and Insights
✓ Smart Nudges
✓ All logs at one place
✓ 100% Ad free
Download Free
tap health
tap.health logo
copyright © 2025
GH-5/11B Orchid garden suncity,
sector-54, DLF QE, Gurugram, 122002,
Haryana, India
  • About Us
  • Blog
  • Doctor login
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Return / Shipping Policy
  • Terms and Conditions
Get Your Free AI Diabetes Coach