डायबिटीज़ के मरीजों में एक बहुत आम समस्या है – बिना वजह बार-बार डर लगना। कभी अचानक दिल की धड़कन तेज हो जाती है, पसीना आता है, हाथ-पैर कांपने लगते हैं और लगता है जैसे कुछ बुरा होने वाला है। कई लोग इसे “पैनिक अटैक” या “टेंशन” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) का बड़ा संकेत हो सकता है? इंडिया में डायबिटीज़ वाले लाखों लोग इस समस्या से जूझते हैं, लेकिन इसे शुगर से जोड़कर नहीं देखते।
यह कोई सामान्य डर नहीं है। डायबिटीज़ में जब ब्लड शुगर बहुत नीचे गिर जाता है (७० mg/dL से कम) तो शरीर बचाव मोड में चला जाता है। एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन तेजी से निकलते हैं, जो डर और एंग्जाइटी के लक्षण पैदा करते हैं। अगर समय पर पहचान न हुई तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। आइए समझते हैं कि डायबिटीज़ में बार-बार डर लगना हाइपोग्लाइसीमिया का संकेत कैसे बन जाता है और इसे कैसे मैनेज किया जा सकता है।
हाइपोग्लाइसीमिया क्या है और क्यों आता है डर का एहसास?
हाइपोग्लाइसीमिया तब होता है जब ब्लड शुगर ७० mg/dL से नीचे गिर जाता है। डायबिटीज़ वाले लोगों में दवा (खासकर इंसुलिन या सल्फोनिलयूरिया), ज्यादा एक्सरसाइज, कम खाना या अल्कोहल पीने से यह स्थिति आ सकती है।
जब शुगर कम होती है तो ब्रेन को ऊर्जा की कमी महसूस होती है। शरीर बचाव में एड्रेनालिन (एपिनेफ्रीन) और कोर्टिसोल छोड़ता है। ये हार्मोन “फाइट-ऑर-फ्लाइट” मोड शुरू कर देते हैं।
- दिल की धड़कन तेज हो जाती है
- पसीना आता है, हाथ-पैर कांपते हैं
- डर, घबराहट या एंग्जाइटी का एहसास होता है
- सिरदर्द, चक्कर या कंफ्यूजन हो सकता है
इंडिया में डायबिटीज़ मरीजों में हाइपोग्लाइसीमिया की घटनाएँ बहुत ज्यादा हैं क्योंकि दवा का डोज़ सही न होने या अनियमित खान-पान की वजह से शुगर बहुत तेज गिर जाती है।
बार-बार डर लगना और हाइपोग्लाइसीमिया का न्यूरोलॉजिकल कनेक्शन
डायबिटीज़ में लो शुगर होने पर ब्रेन का अमिग्डाला (डर का केंद्र) हाइपरएक्टिव हो जाता है।
- ब्रेन को ग्लूकोज़ की कमी होती है → न्यूरॉन्स ठीक से काम नहीं कर पाते
- अमिग्डाला बिना वजह “खतरा” का सिग्नल देता है
- प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स (नियंत्रण केंद्र) कमजोर पड़ जाता है → डर पर काबू नहीं रहता
- इंडिया में स्ट्रेसफुल लाइफस्टाइल की वजह से यह कनेक्शन और मजबूत हो जाता है
अगर हाइपोग्लाइसीमिया बार-बार होता है तो ब्रेन में न्यूरोपैथी बढ़ सकती है, जो डर और एंग्जाइटी को क्रॉनिक बना देती है।
इंडिया में डायबिटीज़ मरीजों में हाइपोग्लाइसीमिया के आम कारण
इंडिया में डायबिटीज़ वाले करीब ४०–५०% मरीजों को साल में कम से कम १–२ बार गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया होता है।
- दवा का ओवरडोज (इंसुलिन या ग्लिमेप्राइड जैसी दवाएँ)
- खाना समय पर न खाना या कम खाना
- ज्यादा एक्सरसाइज या काम करना
- अल्कोहल पीना या स्मोकिंग
- गर्मी में पसीना ज्यादा आना – डिहाइड्रेशन से शुगर गिरती है
ये कारण डर, घबराहट और पैनिक जैसे लक्षण पैदा करते हैं, जो लोग “मानसिक समस्या” समझकर इग्नोर कर देते हैं।
हाइपोग्लाइसीमिया में डर लगने का क्या खतरा है?
बार-बार डर लगना सिर्फ असुविधा नहीं है, यह डायबिटीज़ को और बिगाड़ सकता है।
- डर से कोर्टिसोल बढ़ता है → लिवर से ग्लूकोज़ रिलीज़ होती है → शुगर रिबाउंड हाई हो जाती है
- क्रॉनिक एंग्जाइटी से नींद बिगड़ती है → इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ती है
- हाइपोग्लाइसीमिया के डर से लोग दवा कम लेने लगते हैं → शुगर हाई रहती है
- इंडिया में यह समस्या इसलिए ज्यादा है क्योंकि लोग हाइपो के लक्षणों को “घरेलू इलाज” से ठीक करने की कोशिश करते हैं
अशोक की डर वाली मुश्किल
अशोक जी, ५५ साल, लखनऊ। १० साल से टाइप २ डायबिटीज़। इंसुलिन लेते थे। रात को बार-बार डर लगता था – दिल की धड़कन तेज, पसीना आता, लगता जैसे दिल का दौरा पड़ रहा है। डॉक्टर से कहा तो बोले “टेंशन है”। लेकिन शुगर पैटर्न देखा तो रात में शुगर ५५–६५ तक गिर जाती थी।
टैप हेल्थ ऐप पर पैटर्न देखा तो रात में हाइपोग्लाइसीमिया के एपिसोड और सुबह रिबाउंड हाई शुगर दिखा। डॉ. अमित गुप्ता ने समझाया कि इंसुलिन का डोज़ ज्यादा था और शाम को कम खाने की वजह से हाइपो हो रहा था। इंसुलिन डोज़ एडजस्ट किया, शाम को लो GI स्नैक जोड़ा। ४ महीने में रात में डर लगना बंद हो गया। फास्टिंग १२०–१३५ के बीच आने लगी।
अशोक कहते हैं: “मैं सोचता था डर लगना उम्र की बात है। पता चला मेरी डायबिटीज़ और हाइपोग्लाइसीमिया ही इसका कारण था। अब शाम को स्नैक लेता हूँ, डर बिल्कुल नहीं लगता।”
डायबिटीज़ मैनेजमेंट का भरोसेमंद साथी
टैप हेल्थ एक AI आधारित डायबिटीज़ मैनेजमेंट ऐप है जो अनुभवी डॉक्टर्स की टीम द्वारा तैयार किया गया है। यह ऐप डायबिटीज़ मरीजों को हाइपोग्लाइसीमिया और इसके लक्षणों से बचाने में बहुत मदद करता है।
ऐप में आप रात में डर, घबराहट या कंपकंपी के एपिसोड लॉग कर सकते हैं। अगर ये एपिसोड शुगर ड्रॉप के साथ जुड़े हैं तो ऐप तुरंत अलर्ट देता है और दवा-डाइट एडजस्टमेंट की सलाह देता है। साथ ही यह रात में लो GI स्नैक रिमाइंडर, सुबह समय पर नाश्ता और स्ट्रेस मैनेजमेंट टिप्स भी देता है। इंडिया में हजारों यूजर्स ने इससे हाइपोग्लाइसीमिया के एपिसोड कम करके शुगर पैटर्न को स्थिर किया है।
डॉ. अमित गुप्ता की सलाह
टैप हेल्थ के साथ कार्यरत डायबिटीज़ विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता कहते हैं:
“इंडिया में डायबिटीज़ मरीजों में बार-बार डर लगना बहुत आम समस्या है। यह हाइपोग्लाइसीमिया का बड़ा संकेत होता है। जब ब्लड शुगर ७० mg/dL से नीचे गिरता है तो एड्रेनालिन और कोर्टिसोल तेजी से निकलते हैं। दिल की धड़कन तेज होती है, पसीना आता है और डर का एहसास होता है।
सबसे पहले रात में शुगर चेक करें। अगर ९० से नीचे है तो तुरंत १५ ग्राम कार्ब्स (ग्लूकोज टैबलेट, जूस) लें। शाम को लो GI स्नैक जरूर लें। दवा का डोज़ डॉक्टर से एडजस्ट करवाएँ। टैप हेल्थ ऐप से रात के लक्षण और शुगर पैटर्न ट्रैक करें। अगर डर लगने के साथ हाइपोग्लाइसीमिया के एपिसोड हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। HbA1c ७% से नीचे लाने पर हाइपोग्लाइसीमिया से बचाव बहुत जरूरी हो जाता है।”
डायबिटीज़ में बार-बार डर लगने से बचने के प्रैक्टिकल उपाय
सबसे प्रभावी नियम
- रात में शुगर ९० से नीचे न जाने दें – शाम को लो GI स्नैक लें
- हाइपो के लक्षण (डर, कंपकंपी, पसीना) आने पर तुरंत १५ ग्राम कार्ब्स लें
- दवा का समय और डोज़ डॉक्टर से चेक करवाएँ
- रोज़ १० मिनट मेडिटेशन करें – डर के एहसास को कम करता है
- रात को सोने से पहले ज्यादा पानी न पीएँ – नॉक्चुरिया कम होगा
घरेलू और सपोर्टिव उपाय
- शाम को चना या बादाम लें – लो GI और प्रोटीन से शुगर स्थिर रहती है
- १० मिनट डीप ब्रीदिंग – डर लगने पर तुरंत करें
- ग्लूकोमीटर हमेशा पास रखें – लक्षण आने पर चेक करें
- परिवार को हाइपो के लक्षण बताएँ – मदद मिलेगी
- हल्दी वाला दूध लें – इन्फ्लेमेशन कम करता है
हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण और शुगर लेवल
| शुगर लेवल (mg/dL) | मुख्य लक्षण | डर का एहसास | क्या करें | खतरा स्तर |
|---|---|---|---|---|
| ७०–९० | हल्का पसीना, थकान | हल्का | कार्ब्स लें (१५ ग्राम) | कम |
| ५०–७० | कंपकंपी, दिल की धड़कन तेज | मध्यम | तुरंत ग्लूकोज टैबलेट + डॉक्टर | मध्यम |
| <५० | तेज डर, चक्कर, कंफ्यूजन | बहुत तेज | आपातकालीन मदद + अस्पताल | बहुत उच्च |
कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
- बार-बार डर लगने के साथ शुगर ७० से नीचे गिरना
- लक्षण आने पर ग्लूकोज लेने के बाद भी राहत न मिलना
- दिनभर थकान, सिरदर्द या चक्कर आना
- वजन तेजी से घटना या कामेच्छा कम होना
- लक्षण २-३ दिन से ज्यादा रहें और बिगड़ रहे हों
ये सभी हाइपोग्लाइसीमिया की जटिलताओं या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के संकेत हो सकते हैं।
डायबिटीज़ में बार-बार डर लगना हाइपोग्लाइसीमिया का बड़ा संकेत होता है। जब ब्लड शुगर बहुत नीचे गिरता है तो शरीर एड्रेनालिन और कोर्टिसोल छोड़ता है, जो डर, घबराहट और पैनिक के लक्षण पैदा करता है। अगर समय पर पहचान न हुई तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। इंडिया में डायबिटीज़ मरीजों में यह समस्या इसलिए ज्यादा है क्योंकि दवा का डोज़ सही न होने या अनियमित खान-पान की वजह से शुगर तेज गिरती है।
सबसे पहले रात में शुगर चेक करें। अगर ९० से नीचे है तो तुरंत १५ ग्राम कार्ब्स लें। शाम को लो GI स्नैक जरूर लें। दवा का डोज़ डॉक्टर से एडजस्ट करवाएँ। ज्यादातर मामलों में सही स्नैकिंग से हाइपोग्लाइसीमिया के एपिसोड ७०–८०% तक कम हो जाते हैं।
अपने लक्षणों को समझें। क्योंकि बार-बार डर लगना डायबिटीज़ का सबसे बड़ा अलार्म हो सकता है।
FAQs: डायबिटीज़ में डर लगने से जुड़े सवाल
1. डायबिटीज़ में बार-बार डर लगना हाइपोग्लाइसीमिया का संकेत क्यों होता है?
क्योंकि लो शुगर से एड्रेनालिन निकलता है जो डर और घबराहट पैदा करता है।
2. हाइपोग्लाइसीमिया में डर लगने का मुख्य कारण क्या है?
ब्रेन को ग्लूकोज़ की कमी से अमिग्डाला हाइपरएक्टिव हो जाता है।
3. हाइपोग्लाइसीमिया से डर लगने पर क्या करना चाहिए?
तुरंत १५ ग्राम कार्ब्स (ग्लूकोज टैबलेट या जूस) लें और शुगर चेक करें।
4. इंडिया में यह समस्या क्यों ज्यादा है?
दवा का ओवरडोज और अनियमित खान-पान से हाइपो बहुत आम है।
5. टैप हेल्थ ऐप कैसे मदद करता है?
रात के लक्षण ट्रैक करता है, हाइपो अलर्ट देता है और स्नैक रिमाइंडर देता है।
6. कब डॉक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए?
बार-बार डर लगने के साथ शुगर ७० से नीचे गिरने पर तुरंत।
7. क्या हाइपोग्लाइसीमिया हमेशा डर लगाता है?
नहीं – कुछ मरीजों में लक्षण नहीं आते (हाइपोग्लाइसीमिया अनावेयरनेस), जो और खतरनाक है।
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