tap.health logo
  • Diabetes Management
  • Health Assistant
  • About Us
  • Blog
  • Contact Us
Start Free Trial
  • Diabetes Management
  • Health Assistant
  • About Us
  • Blog
  • Contact Us
  • All Blogs
  • Hindi
  • मधुमेह कोमा के लक्षण

मधुमेह कोमा के लक्षण

Hindi
August 24, 2024
• 8 min read
Naimish Mishra
Written by
Naimish Mishra
ChatGPT Perplexity WhatsApp LinkedIn X Grok Google AI
diabetic-coma-symptoms-in-hindi

मधुमेह कोमा एक गंभीर स्थिति है, जिसे समझना और सही समय पर इलाज करना महत्वपूर्ण है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है या बहुत कम हो जाता है, जिससे मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

मधुमेह कोमा

मधुमेह कोमा एक संभावित जीवन-धमकी देने वाली स्थिति है, जो तब होती है जब मधुमेह रोगी का ब्लड शुगर स्तर नियंत्रण से बाहर हो जाता है। यह स्थिति या तो हाइपरग्लाइसीमिया (अत्यधिक उच्च रक्त शर्करा) या हाइपोग्लाइसीमिया (अत्यधिक कम रक्त शर्करा) के कारण हो सकती है। यह स्थिति शरीर की कोशिकाओं को आवश्यक ऊर्जा नहीं मिलने के कारण होती है, जिसके परिणामस्वरूप कोमा जैसी अवस्था उत्पन्न हो सकती है।

मधुमेह कोमा के प्रकार

हाइपरग्लाइसीमिक कोमा

हाइपरग्लाइसीमिक कोमा तब होता है जब रक्त में शर्करा का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। यह स्थिति अक्सर टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह दोनों के रोगियों में पाई जाती है। हाइपरग्लाइसीमिक कोमा के लक्षणों में अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आना, थकान, उल्टी, पेट दर्द, और सांसों में फल जैसी गंध शामिल हो सकती है।

हाइपोग्लाइसीमिक कोमा

हाइपोग्लाइसीमिक कोमा तब होता है जब रक्त में शर्करा का स्तर अत्यधिक कम हो जाता है। यह स्थिति अधिकतर इंसुलिन या अन्य मधुमेह दवाओं के अधिक मात्रा में सेवन, भोजन के समय में देरी, या अत्यधिक शारीरिक व्यायाम के कारण हो सकती है। हाइपोग्लाइसीमिक कोमा के लक्षणों में भ्रम, पसीना, दिल की धड़कन का तेज होना, थकान, भूख, चिड़चिड़ापन और बेहोशी शामिल हो सकते हैं।

मधुमेह कोमा के सामान्य लक्षण

अत्यधिक प्यास

मधुमेह कोमा के सबसे सामान्य लक्षणों में से एक है अत्यधिक प्यास। यह तब होता है जब शरीर में अत्यधिक ग्लूकोज के कारण तरल पदार्थ की आवश्यकता बढ़ जाती है, जिससे रोगी को बार-बार प्यास लगती है।

बार-बार पेशाब आना

यह लक्षण अत्यधिक प्यास के साथ जुड़ा हुआ है। शरीर अत्यधिक शर्करा को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिसके परिणामस्वरूप बार-बार पेशाब आता है।

थकान और कमजोरी

जब शरीर के कोशिकाओं को पर्याप्त ग्लूकोज नहीं मिलता है, तो यह थकान और कमजोरी का कारण बन सकता है। यह स्थिति मस्तिष्क और मांसपेशियों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है।

उल्टी और पेट दर्द

अत्यधिक रक्त शर्करा के कारण पेट में ऐंठन और उल्टी हो सकती है। यह लक्षण हाइपरग्लाइसीमिक कोमा में सामान्य रूप से देखे जाते हैं।

श्वास की समस्या

मधुमेह कोमा के रोगियों में सांसों की गति तेज हो सकती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शरीर अधिक शर्करा के प्रभाव से जूझ रहा होता है और अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

भ्रम और चिड़चिड़ापन

मधुमेह कोमा के रोगियों में मानसिक भ्रम और चिड़चिड़ापन भी देखा जा सकता है। यह स्थिति मस्तिष्क में ग्लूकोज की कमी के कारण होती है।

बेहोशी

मधुमेह कोमा की स्थिति में रोगी बेहोश हो सकता है। यह स्थिति हाइपरग्लाइसीमिया या हाइपोग्लाइसीमिया दोनों के कारण हो सकती है और यह एक गंभीर संकेत होता है जिसे तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।

मधुमेह कोमा के कारण

मधुमेह का असंतुलित प्रबंधन

मधुमेह कोमा का सबसे बड़ा कारण मधुमेह का सही से प्रबंधन न करना है। यदि रोगी समय पर दवाएं नहीं लेता, अनियंत्रित भोजन करता है या नियमित जांच नहीं करवाता है, तो यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

संक्रमण और बीमारियां

संक्रमण या अन्य बीमारियां भी मधुमेह कोमा का कारण बन सकती हैं। संक्रमण के दौरान शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे रक्त शर्करा का स्तर प्रभावित हो सकता है।

अत्यधिक शराब का सेवन

अत्यधिक शराब का सेवन रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित कर सकता है, जिससे मधुमेह कोमा की संभावना बढ़ जाती है। शराब के सेवन से शरीर में ग्लूकोज का निर्माण कम हो सकता है, जिससे हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है।

मानसिक और शारीरिक तनाव

मानसिक और शारीरिक तनाव भी मधुमेह कोमा का कारण बन सकता है। तनाव के कारण शरीर में शर्करा का स्तर अनियंत्रित हो सकता है, जो कोमा की स्थिति पैदा कर सकता है।

मधुमेह कोमा का निदान

रक्त शर्करा परीक्षण

मधुमेह कोमा का निदान करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण रक्त शर्करा परीक्षण है। इस परीक्षण से पता चलता है कि रोगी का शर्करा स्तर कितना अधिक या कम है।

केटोन परीक्षण

केटोन परीक्षण भी महत्वपूर्ण है, खासकर हाइपरग्लाइसीमिक कोमा के मामलों में। केटोन परीक्षण से पता चलता है कि शरीर में कितनी मात्रा में केटोन बने हैं, जो शरीर के वसा के टूटने से उत्पन्न होते हैं।

यूरिन टेस्ट

यूरिन टेस्ट के माध्यम से भी मधुमेह कोमा का निदान किया जा सकता है। इस टेस्ट से शरीर में शर्करा और केटोन की मात्रा का पता चलता है, जो कोमा की स्थिति का संकेत हो सकते हैं।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की जाँच

मधुमेह कोमा में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इलेक्ट्रोलाइट्स, जैसे कि सोडियम, पोटेशियम, और क्लोराइड का संतुलन शरीर के सामान्य कार्यों के लिए आवश्यक होता है, और इनका असंतुलन कोमा का कारण बन सकता है।

मधुमेह कोमा का उपचार

चिकित्सा सहायता प्राप्त करना

मधुमेह कोमा की स्थिति में सबसे पहला कदम चिकित्सा सहायता प्राप्त करना है। यह एक आपातकालीन स्थिति है और इसमें समय का बहुत महत्व होता है।

इंसुलिन थेरेपी

यदि हाइपरग्लाइसीमिक कोमा का कारण अत्यधिक शर्करा स्तर है, तो इंसुलिन थेरेपी आवश्यक हो सकती है। इंसुलिन थेरेपी से रक्त में शर्करा स्तर को कम किया जा सकता है और रोगी की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

ग्लूकोज प्रशासन

यदि हाइपोग्लाइसीमिक कोमा का कारण शर्करा की कमी है, तो ग्लूकोज का प्रशासन आवश्यक हो सकता है। इसे नस के माध्यम से दिया जा सकता है ताकि रोगी का शर्करा स्तर तेजी से बढ़ सके।

इलेक्ट्रोलाइट सप्लीमेंट्स

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन को ठीक करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट सप्लीमेंट्स दिए जा सकते हैं। इससे शरीर में आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बहाल हो सकता है।

जलयोजन

मधुमेह कोमा के दौरान शरीर में तरल पदार्थ की कमी हो सकती है, इसलिए जलयोजन भी आवश्यक होता है। इसे नस के माध्यम से तरल पदार्थ देकर किया जा सकता है।

मधुमेह कोमा से बचाव

नियमित रक्त शर्करा की जांच

मधुमेह कोमा से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है नियमित रक्त शर्करा की जांच। इससे आप अपने शर्करा स्तर को नियंत्रित रख सकते हैं और किसी भी असामान्यता को समय पर पहचान सकते हैं।

दवाओं का समय पर सेवन

मधुमेह रोगियों के लिए दवाओं का समय पर सेवन बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आप अपनी दवाएं समय पर लेते हैं, तो आपका शर्करा स्तर नियंत्रण में रहेगा और कोमा की संभावना कम होगी।

स्वस्थ भोजन और आहार योजना

स्वस्थ भोजन और आहार योजना भी मधुमेह कोमा से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आपको अपने आहार में संतुलित मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा का सेवन करना चाहिए।

नियमित व्यायाम

नियमित व्यायाम भी मधुमेह कोमा से बचने में सहायक होता है। व्यायाम से आपका शर्करा स्तर नियंत्रण में रहता है और आपकी ऊर्जा का स्तर भी बढ़ता है।

मानसिक तनाव का प्रबंधन

मानसिक तनाव का प्रबंधन भी मधुमेह कोमा से बचाव में महत्वपूर्ण है। योग, ध्यान, और अन्य तनाव-प्रबंधन तकनीकों का उपयोग करके आप अपने तनाव को नियंत्रित कर सकते हैं।

मधुमेह कोमा के दौरान प्राथमिक चिकित्सा

ब्लड शुगर की जांच करें

यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह कोमा के लक्षण दिखते हैं, तो सबसे पहले ब्लड शुगर की जांच करें। इससे आप यह समझ सकेंगे कि व्यक्ति की स्थिति कितनी गंभीर है और क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

ग्लूकोज या शुगर-युक्त खाद्य पदार्थ दें

यदि व्यक्ति हाइपोग्लाइसीमिक कोमा में है, तो उसे ग्लूकोज या शुगर-युक्त खाद्य पदार्थ देना सहायक हो सकता है। इसे जल्दी से करें ताकि व्यक्ति का शर्करा स्तर सामान्य हो सके।

चिकित्सकीय सहायता बुलाएँ

यदि स्थिति गंभीर है और व्यक्ति बेहोश है, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता बुलाएँ। यह एक आपातकालीन स्थिति है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है।

बेहोशी की स्थिति में व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाएँ

यदि व्यक्ति बेहोश है, तो उसे एक सुरक्षित स्थान पर ले जाएँ और उसे बाएं तरफ लिटाएं। इससे सांस लेने में सुविधा होगी और उल्टी होने पर उसे सुरक्षित रखा जा सकेगा।

मधुमेह कोमा के दीर्घकालिक प्रभाव

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

मधुमेह कोमा के दीर्घकालिक प्रभावों में मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर हो सकता है। कुछ रोगियों में कोमा के बाद मानसिक भ्रम या अवसाद देखा जा सकता है।

मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव

कोमा की स्थिति में मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप, व्यक्ति की स्मृति, सोचने की क्षमता, और अन्य मानसिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।

दिल और रक्त वाहिकाओं पर प्रभाव

मधुमेह कोमा के दौरान दिल और रक्त वाहिकाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। रक्त शर्करा के स्तर में अचानक बदलाव से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।

किडनी और अन्य अंगों पर प्रभाव

मधुमेह कोमा के दीर्घकालिक प्रभावों में किडनी और अन्य अंगों पर भी असर देखा जा सकता है। किडनी की कार्यक्षमता में कमी आ सकती है, जिससे किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।

मधुमेह कोमा के लिए घरेलू उपाय

ग्रीन टी का सेवन

ग्रीन टी एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होती है और यह रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक होती है। इसे नियमित रूप से पीने से मधुमेह कोमा का खतरा कम हो सकता है।

मेथी दाना

मेथी दाना को पानी में भिगोकर पीना भी रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक होता है। यह मधुमेह रोगियों के लिए एक प्राकृतिक उपाय है।

दालचीनी

दालचीनी का सेवन भी मधुमेह कोमा से बचाव में सहायक हो सकता है। यह शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाती है और रक्त शर्करा को नियंत्रित करती है।

विटामिन डी

विटामिन डी की कमी भी मधुमेह कोमा का कारण बन सकती है। इसलिए, धूप में समय बिताना या विटामिन डी सप्लीमेंट्स का सेवन करना महत्वपूर्ण है।

हल्दी

हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो मधुमेह कोमा के जोखिम को कम करने में सहायक होते हैं। इसे अपने आहार में शामिल करें।

मधुमेह कोमा के लिए विशेषज्ञों की सलाह

नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह लें

मधुमेह रोगियों को नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इससे आप अपने स्वास्थ्य की निगरानी कर सकते हैं और मधुमेह कोमा से बच सकते हैं।

समय पर जांच और टेस्ट कराएं

समय पर जांच और टेस्ट कराना भी महत्वपूर्ण है। इससे आप अपने शर्करा स्तर को नियंत्रित रख सकते हैं और किसी भी असामान्यता को समय पर पहचान सकते हैं।

जीवनशैली में बदलाव करें

जीवनशैली में बदलाव, जैसे कि स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, और तनाव का प्रबंधन, मधुमेह कोमा से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

परिवार और दोस्तों से समर्थन लें

मधुमेह कोमा से निपटने के लिए परिवार और दोस्तों का समर्थन भी महत्वपूर्ण है। उनकी सहायता से आप मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं।

मधुमेह कोमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उपाय

शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम

शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम मधुमेह कोमा के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोग इस स्थिति के लक्षणों और उपचार के बारे में जागरूक हो सकते हैं।

स्वास्थ्य शिविर

स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर मधुमेह कोमा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। इन शिविरों में रक्त शर्करा की जांच, पोषण परामर्श, और मधुमेह के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

मीडिया और सोशल मीडिया का उपयोग

मीडिया और सोशल मीडिया का उपयोग कर मधुमेह कोमा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। इसके माध्यम से लोग इस स्थिति के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मधुमेह कोमा एक गंभीर और जीवन-धमकी देने वाली स्थिति है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस स्थिति के लक्षणों को पहचानना, सही समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करना, और मधुमेह का सही से प्रबंधन करना आवश्यक है। स्वस्थ जीवनशैली, नियमित जांच, और मानसिक तनाव का प्रबंधन भी इस स्थिति से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जागरूकता, शिक्षा, और समुदाय के समर्थन से मधुमेह कोमा के जोखिम को कम किया जा सकता है। यदि आप या आपके परिवार में कोई व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित है, तो इस जानकारी को ध्यान में रखें और इसे अपने दैनिक जीवन में लागू करें।

FAQs

Q.1 – मधुमेह कोमा का सबसे सामान्य कारण क्या है?
मधुमेह कोमा का सबसे सामान्य कारण रक्त शर्करा का अत्यधिक बढ़ना या कम होना है। इसका कारण अनियंत्रित मधुमेह, संक्रमण, तनाव, या दवाओं का असंतुलित सेवन हो सकता है।

Q.2 – मधुमेह कोमा के लक्षण क्या होते हैं?
मधुमेह कोमा के लक्षणों में अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आना, थकान, उल्टी, श्वास की समस्या, भ्रम, और बेहोशी शामिल हैं।

Q.3 – मधुमेह कोमा का निदान कैसे किया जाता है?
मधुमेह कोमा का निदान रक्त शर्करा परीक्षण, केटोन परीक्षण, यूरिन टेस्ट, और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की जांच के माध्यम से किया जाता है।

Q.4 – मधुमेह कोमा का उपचार कैसे किया जाता है?
मधुमेह कोमा का उपचार इंसुलिन थेरेपी, ग्लूकोज प्रशासन, इलेक्ट्रोलाइट सप्लीमेंट्स, और जलयोजन के माध्यम से किया जाता है। इसके लिए तुरंत चिकित्सा सहायता आवश्यक होती है।

Q.5 – क्या मधुमेह कोमा से बचा जा सकता है?
हां, मधुमेह कोमा से बचाव संभव है। इसके लिए नियमित रक्त शर्करा की जांच, दवाओं का समय पर सेवन, स्वस्थ भोजन, और तनाव का प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

Tags
Medicine Health Lifestyle Home remedies Fitness Prevention Hygiene Ailments Hindi skin diseases acne vulgaris symptoms AI Search
More blogs
Dhruv Sharma
Dhruv Sharma
• January 16, 2026
• 6 min read

Do Steroids Raise Blood Sugar in Non-Diabetics? Exploring the Effects on Blood Glucose

Steroids are powerful medications used to treat a variety of conditions, from inflammation and autoimmune diseases to allergies and asthma. But if you’re a non-diabetic and prescribed steroids, you might be wondering: Do steroids raise blood sugar in non-diabetics? In this article, we’ll explore how steroids can affect blood sugar levels, even in people who […]

Diabetes
diabetic-coma-symptoms-in-hindi
Dhruv Sharma
Dhruv Sharma
• January 16, 2026
• 7 min read

Are Rice Noodles Good for Diabetics? What You Need to Know

Managing diabetes can feel like a constant balancing act. You want to enjoy the foods you love, but you also need to be careful about what you eat, especially when it comes to carbs. Rice noodles are a popular choice in many dishes like stir-fries, soups, and salads, but if you have diabetes, you may […]

Diabetes
diabetic-coma-symptoms-in-hindi
Abhishek Gupta
Abhishek Gupta
• January 16, 2026
• 7 min read

Are Brussel Sprouts Good for Diabetes? Exploring the Health Benefits

Managing diabetes involves making smart food choices that help regulate blood sugar levels. Vegetables are an essential part of a healthy diet for people with diabetes, but with so many options available, it’s natural to wonder which ones are best. Are brussel sprouts good for diabetes? Brussel sprouts, a cruciferous vegetable, are not only tasty […]

Diabetes
diabetic-coma-symptoms-in-hindi
Do you remember your last sugar reading?
Log and Track your glucose on the Tap Health App
All logs in one place
Smart trend graphs
Medicine Reminder
100% Ad Free
Download Now

Missed your diabetes meds

again? Not anymore.

Get medicine reminders on your phone.

✓ Glucose diary and Insights
✓ Smart Nudges
✓ All logs at one place
✓ 100% Ad free
Download Free
tap health
tap.health logo
copyright © 2025
GH-5/11B Orchid garden suncity,
sector-54, DLF QE, Gurugram, 122002,
Haryana, India
  • About Us
  • Blog
  • Doctor login
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Return / Shipping Policy
  • Terms and Conditions
Get Your Free AI Diabetes Coach