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गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप: कारण, लक्षण और उपचार

Hindi
October 4, 2024
• 5 min read
Naimish Mishra
Written by
Naimish Mishra
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गर्भावस्था एक महिला के जीवन का बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय होता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण मुद्दा है – गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप। इसे ‘गर्भावस्था संबंधी उच्च रक्तचाप’ (Gestational Hypertension) या ‘प्री-एक्लेमप्सिया’ (Preeclampsia) कहा जाता है। यह स्थिति न केवल माँ के लिए बल्कि बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिमपूर्ण हो सकती है। 

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप क्या है?

जब किसी गर्भवती महिला का रक्तचाप 140/90 मिमी एचजी या उससे अधिक होता है, तो इसे गर्भावस्था संबंधी उच्च रक्तचाप कहा जाता है। यह स्थिति गर्भावस्था के 20 सप्ताह बाद से विकसित हो सकती है और इसे प्रेग्नेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन (PIH) भी कहा जाता है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, जो गर्भावस्था के अंत तक और प्रसव के बाद तक भी बनी रह सकती है।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के प्रकार

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के मुख्य तीन प्रकार होते हैं:

  1. प्रेग्नेंसी-इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन (PIH):
    यह एक ऐसी स्थिति है जो गर्भावस्था के दौरान विकसित होती है और प्रसव के बाद स्वतः ठीक हो सकती है। इसमें ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक हो जाता है, लेकिन अन्य कोई गंभीर जटिलताएँ नहीं होतीं।
  2. प्री-एक्लेमप्सिया:
    यह गर्भावस्था में सबसे गंभीर प्रकार का उच्च रक्तचाप होता है, जिसमें न केवल ब्लड प्रेशर बढ़ता है बल्कि किडनी और अन्य अंगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसमें पेशाब में प्रोटीन की उपस्थिति, सूजन, और सिरदर्द जैसे लक्षण भी होते हैं।
  3. क्रॉनिक हाइपरटेंशन:
    यदि महिला को गर्भावस्था से पहले से ही उच्च रक्तचाप की समस्या है, तो इसे क्रॉनिक हाइपरटेंशन कहा जाता है। इसका गर्भावस्था के दौरान विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है, क्योंकि इससे जटिलताएँ बढ़ सकती हैं।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के कारण

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ सामान्य हैं:

  1. अनुवांशिक कारक:
    यदि आपके परिवार में किसी को उच्च रक्तचाप की समस्या रही है, तो गर्भावस्था के दौरान यह जोखिम बढ़ सकता है।
  2. उम्र का प्रभाव:
    उम्र 35 वर्ष से अधिक होने पर गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है।
  3. अधिक वजन या मोटापा:
    मोटापे की स्थिति में गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का खतरा अधिक होता है, क्योंकि शरीर पर अत्यधिक भार पड़ता है और रक्त संचार में समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  4. पहली बार गर्भवती होना:
    प्रथम गर्भावस्था में महिलाओं में उच्च रक्तचाप का जोखिम अन्य गर्भधारण की तुलना में अधिक हो सकता है।
  5. मल्टीपल प्रेग्नेंसी:
    यदि महिला के गर्भ में जुड़वाँ या उससे अधिक बच्चे हैं, तो उच्च रक्तचाप की संभावना अधिक हो जाती है।
  6. पहले से मौजूद चिकित्सा स्थिति:
    यदि महिला को पहले से मधुमेह, किडनी रोग, या अन्य क्रॉनिक बीमारियाँ हैं, तो गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के लक्षण

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के लक्षण विभिन्न हो सकते हैं, लेकिन सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • लगातार सिरदर्द
  • आंखों के सामने धुंधला या धब्बेदार दृश्य
  • अचानक वजन बढ़ना
  • चेहरे, हाथों, और पैरों में अत्यधिक सूजन
  • ऊपरी पेट में दर्द
  • सांस लेने में कठिनाई

इन लक्षणों में से किसी का अनुभव होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह प्री-एक्लेमप्सिया का संकेत हो सकता है।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का निदान

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप की पहचान करने के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जाँच की जाती है। यदि ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ पाया जाता है, तो डॉक्टर अन्य परीक्षण भी कर सकते हैं, जैसे:

  • पेशाब में प्रोटीन की जाँच
  • रक्त परीक्षण
  • अल्ट्रासाउंड के माध्यम से शिशु के विकास की निगरानी
  • डॉप्लर स्कैन से रक्त प्रवाह की जाँच

इन परीक्षणों से डॉक्टर यह निर्धारित कर सकते हैं कि उच्च रक्तचाप से माँ और शिशु पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का उपचार

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का इलाज महिला और बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। इसमें निम्नलिखित उपाय शामिल हो सकते हैं:

  1. जीवनशैली में बदलाव:
    उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में बदलाव बेहद आवश्यक होते हैं, जैसे:
  • नमक का सेवन कम करना
  • नियमित रूप से व्यायाम करना
  • तनाव प्रबंधन तकनीकें अपनाना
  • उचित मात्रा में आराम करना
  • धूम्रपान और शराब से बचना
  1. मेडिकेशन:
    गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर मेडिकेशन भी लिख सकते हैं, लेकिन ध्यान रखना चाहिए कि हर दवा गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं होती।
  2. नियमित जाँच:
    उच्च रक्तचाप के मामले में गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से डॉक्टर से मिलते रहना चाहिए। इससे माँ और शिशु दोनों की स्थिति पर निगरानी रखना आसान होता है।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के जोखिम

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप माँ और शिशु दोनों के लिए गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है। कुछ मुख्य जोखिमों में शामिल हैं:

  1. समय से पूर्व प्रसव:
    उच्च रक्तचाप के कारण शिशु का विकास धीमा हो सकता है, जिससे समय से पहले प्रसव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  2. शिशु के वजन में कमी:
    उच्च रक्तचाप के कारण गर्भ में शिशु का वजन सामान्य से कम हो सकता है।
  3. प्लेसेंटा का फेलियर:
    गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से प्लेसेंटा के फेलियर की संभावना बढ़ जाती है, जिससे शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
  4. एक्लेमप्सिया:
    यह प्री-एक्लेमप्सिया का एक गंभीर रूप है, जिसमें दौरे पड़ सकते हैं और यह माँ और शिशु दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है।
गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से बचाव

उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  1. संतुलित आहार:
    संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करना गर्भावस्था के दौरान बेहद महत्वपूर्ण है। अधिक फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
  2. नियमित व्यायाम:
    हल्के व्यायाम जैसे योग, वॉकिंग, या तैराकी से गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखा जा सकता है।
  3. मानसिक तनाव कम करें:
    तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान, प्राणायाम, या आरामदायक संगीत सुनने जैसी तकनीकों का सहारा लें।
  4. नियमित जाँच:
    गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जाँच करवाते रहना चाहिए। इससे किसी भी समस्या का समय पर निदान किया जा सकता है।
  5. तरल पदार्थों का पर्याप्त सेवन:
    पानी और अन्य तरल पदार्थों का पर्याप्त सेवन करें, ताकि शरीर में रक्त प्रवाह सही बना रहे।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप एक चुनौतीपूर्ण स्थिति हो सकती है, लेकिन सही देखभाल और उपचार से इसे प्रबंधित किया जा सकता है। माँ और शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए समय पर निदान, नियमित जाँच, और उचित जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। गर्भावस्था का यह सफर स्वस्थ और सुखद हो, इसके लिए हर कदम पर सतर्कता और समझदारी बरतना महत्वपूर्ण है।

FAQs

Q.1 – गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप कितनी गंभीर स्थिति है?
गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप एक गंभीर स्थिति हो सकती है, विशेष रूप से यदि इसे नियंत्रित नहीं किया जाए। इससे माँ और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

Q.2 – क्या गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से शिशु को कोई नुकसान होता है?
हाँ, गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है, उसका वजन कम हो सकता है, और समय से पूर्व प्रसव की संभावना भी बढ़ सकती है।

Q.3 – गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का सबसे अच्छा इलाज क्या है?
गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का इलाज महिला की स्थिति पर निर्भर करता है। इसमें जीवनशैली में बदलाव, मेडिकेशन, और नियमित जाँच शामिल हो सकते हैं।

Q.4 – गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के लिए कौन से खाद्य पदार्थ फायदेमंद हैं?
फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

Q.5 – क्या उच्च रक्तचाप वाली महिला सामान्य प्रसव कर सकती है?
यदि उच्च रक्तचाप को ठीक से नियंत्रित किया जाता है और कोई जटिलताएँ नहीं होतीं, तो सामान्य प्रसव संभव हो सकता है।

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