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उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप: कारण, लक्षण, और उपचार

Hindi
September 10, 2024
• 5 min read
Naimish Mishra
Written by
Naimish Mishra
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high-diastolic-blood-pressure

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप (High Diastolic Blood Pressure) को समझना और इसका सही समय पर इलाज करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह दिल और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है। डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर वह दबाव है जो तब होता है जब दिल की मांसपेशियां आराम की स्थिति में होती हैं, यानी जब दिल धड़कनों के बीच में आराम कर रहा होता है। इसे आमतौर पर दूसरी संख्या से मापा जाता है, जैसे 120/80 mm Hg में 80 डायस्टोलिक दबाव है। जब यह संख्या लगातार 80 से ऊपर होती है, तो इसे उच्च माना जाता है।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप क्या है?

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का मतलब है कि धमनियों में रक्त का दबाव सामान्य से अधिक है जब दिल विश्राम कर रहा होता है। इसे हाइपरटेंशन की दूसरी अवस्था भी कहा जाता है, जिसमें रक्तचाप की रीडिंग 90 mm Hg या उससे अधिक होती है। डायस्टोलिक हाइपरटेंशन अक्सर संकेत करता है कि धमनियों की दीवारों में कठोरता या मोटापन है, जिससे रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के कारण

आनुवंशिक कारण: उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का एक बड़ा कारण आनुवंशिक होता है। यदि परिवार में किसी को हाइपरटेंशन है, तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि आपको भी यह समस्या हो सकती है।

जीवनशैली के कारण: अनियमित खान-पान, अत्यधिक नमक का सेवन, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, और शारीरिक गतिविधि की कमी भी उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का कारण बन सकते हैं।

तनाव और चिंता: अत्यधिक मानसिक तनाव, चिंता, और अवसाद भी रक्तचाप को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अधिक वजन और मोटापा: अधिक वजन और मोटापा धमनियों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है।

मधुमेह: डायबिटीज और उच्च रक्तचाप अक्सर साथ-साथ चलते हैं, क्योंकि दोनों स्थितियाँ शरीर में धमनियों को नुकसान पहुँचाती हैं।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के लक्षण

अधिकांश लोग उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के लक्षणों को महसूस नहीं करते हैं, और इसी वजह से इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है। हालांकि, कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

सिरदर्द: अक्सर सिर के पीछे की तरफ दर्द महसूस होना।

थकान और कमजोरी: शरीर में अत्यधिक थकान और बिना किसी कारण के कमजोरी महसूस होना।

चक्कर आना: खड़े होने पर अचानक चक्कर आना या बेहोशी महसूस करना।

दिल की धड़कन तेज होना: दिल की धड़कन का असामान्य रूप से तेज होना या अनियमित होना।

सीने में दर्द: सीने में असहजता या दबाव महसूस करना।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के दीर्घकालिक प्रभाव

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप यदि अनियंत्रित रहा तो यह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है:

हृदय रोग: उच्च रक्तचाप से दिल की धमनियाँ संकुचित या कठोर हो सकती हैं, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

गुर्दे की समस्याएं: रक्तचाप में वृद्धि से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे गुर्दे की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और किडनी फेलियर हो सकता है।

मस्तिष्क के विकार: उच्च रक्तचाप से मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे स्ट्रोक या डिमेंशिया जैसी स्थितियाँ हो सकती हैं।

आँखों की समस्याएं: उच्च रक्तचाप से आँखों की रेटिना की रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे दृष्टि की हानि हो सकती है।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का निदान कैसे करें?

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का निदान नियमित रक्तचाप मापने से किया जा सकता है। चिकित्सक आमतौर पर रक्तचाप की जांच करते हैं और यदि लगातार उच्च रीडिंग आती है, तो इसे हाइपरटेंशन माना जाता है। इसके अलावा, निम्नलिखित परीक्षण भी किए जा सकते हैं:

ईसीजी (ECG): दिल की धड़कन की दर और लय को मापने के लिए किया जाता है।

इकोकार्डियोग्राफी: दिल की संरचना और कार्य का अध्ययन करने के लिए अल्ट्रासाउंड तकनीक।

ब्लड टेस्ट: किडनी फंक्शन, शुगर लेवल, और कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच के लिए।

होम ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग: घर पर ही रक्तचाप की नियमित माप करके भी स्थिति की निगरानी की जा सकती है।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का उपचार

जीवनशैली में परिवर्तन: स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब का त्याग, और तनाव प्रबंधन उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

दवाएं: ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर कई प्रकार की दवाएं लिख सकते हैं, जैसे कि एसीई इनहिबिटर, बीटा ब्लॉकर्स, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, और डायूरेटिक्स।

आहार में बदलाव: नमक का सेवन कम करें, ताजे फल और सब्जियां खाएं, और फाइबर युक्त आहार को प्राथमिकता दें।

वजन प्रबंधन: वजन कम करने से रक्तचाप में भी सुधार होता है। इसलिए, स्वस्थ वजन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

स्ट्रेस मैनेजमेंट: योग, मेडिटेशन, और अन्य रिलैक्सेशन तकनीकों का उपयोग करके तनाव को नियंत्रित करना।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप को कैसे रोकें?

नियमित व्यायाम करें: हर दिन कम से कम 30 मिनट का व्यायाम करें जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना, या तैराकी।

संतुलित आहार: संतुलित आहार लें जिसमें फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, और कम वसा वाले प्रोटीन शामिल हों।

नमक का सेवन कम करें: अधिक नमक का सेवन रक्तचाप को बढ़ा सकता है, इसलिए नमक का सेवन सीमित करें।

धूम्रपान और शराब से बचें: धूम्रपान छोड़ें और शराब का सेवन सीमित करें, क्योंकि ये दोनों रक्तचाप को बढ़ा सकते हैं।

नियमित जांच: नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाएं और चिकित्सक के निर्देशों का पालन करें।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के लिए घरेलू उपाय

लहसुन का सेवन: लहसुन का नियमित सेवन रक्तचाप को कम करने में सहायक हो सकता है।

मेथी के बीज: मेथी के बीजों का सेवन सुबह खाली पेट करना लाभदायक होता है।

हिबिस्कस की चाय: हिबिस्कस की चाय में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं।

तुलसी और नींबू: तुलसी की पत्तियों के रस में नींबू मिलाकर पीना भी फायदेमंद होता है।

ध्यान और प्राणायाम: ध्यान और प्राणायाम तनाव को कम करते हैं, जिससे रक्तचाप नियंत्रित रहता है।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन यह दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। सही समय पर निदान और उचित उपचार से इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और तनाव प्रबंधन के जरिए इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। ध्यान रखें कि रक्तचाप की नियमित जांच और डॉक्टर के परामर्श से ही सही उपचार संभव है।

FAQs

Q.1 – उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के लिए कौन सी दवाएं प्रभावी हैं?

डॉक्टर एसीई इनहिबिटर, बीटा ब्लॉकर्स, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, और डायूरेटिक्स जैसी दवाएं लिख सकते हैं। ये दवाएं ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करती हैं और हृदय को सुरक्षित रखती हैं।

Q.2 – क्या उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप को ठीक किया जा सकता है?

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप को प्रबंधित किया जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह से ठीक करना मुश्किल है। सही दवा, आहार, और जीवनशैली के बदलाव से इसे नियंत्रित रखा जा सकता है।

Q.3 – उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप से हृदय रोग का खतरा कितना बढ़ जाता है?

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप दिल की धमनियों को कठोर बनाता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यह हृदय रोगों के प्रमुख कारणों में से एक है।

Q.4 – क्या व्यायाम से उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप कम हो सकता है?

हाँ, नियमित व्यायाम रक्तचाप को कम करने में सहायक होता है। यह धमनियों को लचीला बनाता है और रक्त प्रवाह में सुधार करता है।

Q.5 – क्या उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप आनुवंशिक होता है?

हां, उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का एक कारण आनुवंशिक भी हो सकता है। यदि परिवार में किसी को हाइपरटेंशन है, तो आपके लिए इसका खतरा बढ़ सकता है।

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