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उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप लक्षण और समाधान

Hindi
September 18, 2024
• 5 min read
Naimish Mishra
Written by
Naimish Mishra
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उच्च रक्तचाप, जिसे हाइपरटेंशन भी कहा जाता है, आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और अस्वस्थ आदतों का एक सामान्य परिणाम है। इस स्थिति में रक्तचाप का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, और यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। जब हम रक्तचाप की बात करते हैं, तो इसमें दो मुख्य माप होते हैं – सिस्टोलिक और डायस्टोलिक। सिस्टोलिक दबाव तब मापा जाता है जब दिल धड़कता है और रक्त को पंप करता है, जबकि डायस्टोलिक दबाव उस समय मापा जाता है जब दिल आराम की स्थिति में होता है। डायस्टोलिक रक्तचाप का सामान्य स्तर 60 से 80 मिमी एचजी (mm Hg) के बीच होता है। जब यह स्तर 90 मिमी एचजी या उससे अधिक हो जाता है, तो इसे उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप माना जाता है।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप क्या है?

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का मतलब है कि जब आपका दिल आराम की स्थिति में होता है, तब भी आपकी धमनियों में दबाव सामान्य से अधिक होता है। यह स्थिति आपके हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है, जिससे दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, और किडनी की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। डायस्टोलिक रक्तचाप में वृद्धि को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण शुरू में हल्के हो सकते हैं और कई बार व्यक्ति को इसका पता भी नहीं चलता।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के लक्षण

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के लक्षण आमतौर पर तब प्रकट होते हैं जब स्थिति गंभीर हो जाती है। हालांकि, कुछ सामान्य लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए:

  • सिरदर्द: उच्च रक्तचाप से जुड़ा सबसे सामान्य लक्षण सिरदर्द है। यह विशेष रूप से सुबह के समय होता है और इसे अक्सर माथे और गर्दन के पास महसूस किया जाता है।
  • थकान और कमजोरी: लगातार थकान महसूस करना और शारीरिक रूप से कमजोर महसूस करना भी उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का संकेत हो सकता है।
  • धुंधली दृष्टि: रक्तचाप के बढ़ने से आंखों की रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे धुंधली दृष्टि या दृष्टि में अचानक परिवर्तन हो सकते हैं।
  • चक्कर आना: उच्च रक्तचाप के कारण मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे चक्कर आना या बेहोशी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  • सीने में दर्द: दिल पर अतिरिक्त दबाव के कारण सीने में दर्द या असुविधा हो सकती है।
  • नाक से खून आना: अत्यधिक रक्तचाप के कारण नाक से खून आ सकता है, हालांकि यह लक्षण कम ही देखा जाता है।
  • अनियमित दिल की धड़कन: जब दिल पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है, तो दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, जिससे व्यक्ति को बेचैनी महसूस हो सकती है।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के कारण

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के कई कारण हो सकते हैं। कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • अनियमित जीवनशैली: अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, और अत्यधिक तनाव उच्च रक्तचाप के मुख्य कारक होते हैं।
  • अत्यधिक नमक का सेवन: भोजन में अत्यधिक नमक का सेवन रक्तचाप को बढ़ा सकता है। यह शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा को बढ़ाकर धमनियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन: धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है। यह रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर देता है और रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है।
  • मोटापा: अधिक वजन होने से दिल पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है।
  • आनुवंशिक कारक: यदि आपके परिवार में किसी को उच्च रक्तचाप की समस्या रही है, तो आपके लिए इसका जोखिम अधिक हो सकता है।
  • तनाव: अत्यधिक मानसिक तनाव और चिंता रक्तचाप को तेजी से बढ़ा सकते हैं, जिससे डायस्टोलिक रक्तचाप में वृद्धि होती है।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का निदान

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का निदान करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर एक रक्तचाप मॉनिटर का उपयोग करते हैं। इसके अलावा, वे आपकी मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक परीक्षण और कुछ अन्य जांचें भी कर सकते हैं। इन जांचों में हो सकता है:

  • ब्लड टेस्ट: आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल और शुगर के स्तर की जांच की जाती है।
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG): इस परीक्षण के जरिए दिल की विद्युत गतिविधि की जांच की जाती है।
  • इकोकार्डियोग्राम: यह परीक्षण दिल की संरचना और उसकी कार्यक्षमता का आकलन करता है।
  • किडनी की जांच: उच्च रक्तचाप से किडनी पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए डॉक्टर किडनी फंक्शन टेस्ट कर सकते हैं।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के उपचार

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के इलाज में जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ दवाओं का सेवन भी शामिल है। कुछ सामान्य उपचार निम्नलिखित हैं:

  • नियमित व्यायाम: शारीरिक गतिविधियों का नियमित अभ्यास रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सहायक होता है। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करने से दिल की सेहत बनी रहती है।
  • संतुलित आहार: अपने आहार में फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, और कम वसा वाले डेयरी उत्पादों को शामिल करें। नमक और सैचुरेटेड फैट का सेवन कम करें।
  • धूम्रपान और शराब से बचें: धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। इसे नियंत्रित करना आवश्यक है।
  • तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान, और अन्य तनाव प्रबंधन तकनीकों का अभ्यास करें। इससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • दवाएं: यदि जीवनशैली में बदलाव के बावजूद रक्तचाप नियंत्रित नहीं होता, तो डॉक्टर कुछ दवाएं लिख सकते हैं, जैसे कि बीटा-ब्लॉकर्स, एसीई इनहिबिटर्स, या कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप से बचाव के तरीके

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं:

  • नियमित रूप से रक्तचाप मापें: नियमित रूप से अपना रक्तचाप मापें और यदि आपको कोई असामान्यता महसूस होती है, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।
  • स्वस्थ आहार का पालन करें: ताजे फलों और सब्जियों का सेवन बढ़ाएं और जंक फूड से बचें।
  • नियमित व्यायाम करें: प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। यह आपके रक्तचाप को सामान्य रखने में मदद करेगा।
  • धूम्रपान और शराब से बचें: ये आदतें उच्च रक्तचाप का मुख्य कारण हो सकती हैं।
  • तनाव कम करें: अपनी दिनचर्या में योग और ध्यान को शामिल करें। इससे आपका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के दीर्घकालिक प्रभाव

यदि उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का इलाज समय पर नहीं किया जाता, तो यह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके कुछ दीर्घकालिक प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  • दिल का दौरा: उच्च रक्तचाप से दिल की धमनियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ सकता है।
  • स्ट्रोक: रक्तचाप के अत्यधिक बढ़ने से मस्तिष्क की रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं या संकुचित हो सकती हैं, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
  • किडनी की समस्या: उच्च रक्तचाप किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • आंखों की समस्या: रक्तचाप बढ़ने से आंखों की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है, जिससे दृष्टि संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए आहार संबंधी सुझाव

आहार हमारे शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही आहार का सेवन करने से आप उच्च रक्तचाप से बच सकते हैं। यहां कुछ आहार संबंधी सुझाव दिए जा रहे हैं:

  • कम नमक का सेवन करें: नमक का अधिक सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है। कोशिश करें कि प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक का सेवन करें।
  • पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थ खाएं: पोटेशियम रक्तचाप को संतुलित करने में मदद करता है। केले, पालक, आलू, और शकरकंद पोटेशियम से भरपूर होते हैं।
  • साबुत अनाज का सेवन करें: साबुत अनाज, जैसे ब्राउन राइस, ओट्स, और क्विनोआ, रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।
  • वसा रहित डेयरी उत्पाद चुनें: दूध और दही जैसे डेयरी उत्पाद वसा रहित या कम वसा वाले चुनें।

उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसे नजरअंदाज करना घातक साबित हो सकता है। इसके लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार आवश्यक है। सही आहार, नियमित व्यायाम, और तनाव प्रबंधन के जरिए इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

FAQs

Q.1 – उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप क्या है?
उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप तब होता है जब दिल आराम की स्थिति में होता है, लेकिन धमनियों में दबाव सामान्य से अधिक होता है।

Q.2 – उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के सामान्य लक्षण क्या हैं?
सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, धुंधली दृष्टि, और सीने में दर्द उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप के सामान्य लक्षण हो सकते हैं।

Q.3 – क्या उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप का इलाज संभव है?
हां, उचित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन, और दवाओं के माध्यम से उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।

Q.4 – क्या उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?
हां, उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, और किडनी की समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।

Q.5 – क्या उच्च डायस्टोलिक रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेष आहार है?
जी हां, पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थ, साबुत अनाज, वसा रहित डेयरी उत्पाद, और कम नमक वाला आहार उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

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